मेरठ। सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर को फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आदेशों की अवहेलना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और प्रशासनिक अधिकारियों को न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब पूर्व कमिश्नर द्वारा सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश के विपरीत कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण रोकने का आदेश जारी किया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान हृषिकेश भास्कर ने स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ प्रमुख नेताओं के दबाव में मीटिंग कर यह निर्णय लिया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने उनके आदेश को पढ़ते हुए तीखी टिप्पणी की और कहा कि “आपको आदेश और मिनट्स की समझ नहीं है।” कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर उन्हें इस तरह का आदेश जारी करने का अधिकार किसने दिया, जबकि उनकी जिम्मेदारी अदालत के आदेशों का अनुपालन कराना था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 2024 में ही सेंट्रल मार्केट के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए जा चुके थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी और आदेशों की अनदेखी के चलते कार्रवाई में 11 महीने का लंबा समय लग गया।
हालांकि, पूर्व कमिश्नर ने कोर्ट में माफीनामा और हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसके बाद उन्हें तत्काल दंडात्मक कार्रवाई से राहत मिल गई। इसके बावजूद कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बड़ा संदेश दिया है।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने पर उच्च स्तर के अधिकारियों को भी जवाब देना पड़ सकता है।
सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व कमिश्नर को फटकार—माफी लेकर बची कार्रवाई


