नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में बार-बार सुनवाई टालने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 18 मार्च को जारी सर्कुलर में स्पष्ट कर दिया गया है कि अब ‘तारीख पर तारीख’ का दौर खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही मामलों की सुनवाई स्थगित (एडजर्नमेंट) की जाएगी।
नए नियमों के तहत 29 नवंबर और 2 दिसंबर 2025 को जारी पुराने निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है और उनकी जगह सख्त व्यवस्था लागू की गई है। कोर्ट ने ‘रेगुलर मामलों’ को लेकर सबसे कड़ा फैसला सुनाया है। ऐसे मामलों में अब किसी भी परिस्थिति में सुनवाई टालने की अनुमति नहीं होगी, यानी मामला सूचीबद्ध है तो बिना किसी बहाने के सुनवाई अनिवार्य रूप से होगी।
वहीं ‘फ्रेश’ और ‘आफ्टर-नोटिस’ मामलों में भी एडजर्नमेंट की प्रक्रिया को सीमित कर दिया गया है। यदि किसी पक्ष को सुनवाई टालनी है तो उसे पहले से दूसरी पार्टी को इसकी सूचना देनी होगी और इसका प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा। यह प्रक्रिया सुनवाई से एक दिन पहले सुबह 11 बजे तक पूरी करनी अनिवार्य होगी। इसके बाद संबंधित पक्ष को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया है, जो दोपहर 12 बजे तक ईमेल के माध्यम से कोर्ट के समक्ष रखी जा सकेगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब एडजर्नमेंट मांगने वाले पक्ष को ठोस और वास्तविक कारण बताना होगा। साथ ही यह जानकारी भी देनी होगी कि पहले कितनी बार सुनवाई टाली जा चुकी है। बिना उचित कारण के अब तारीख लेना संभव नहीं होगा। सर्कुलर में कहा गया है कि केवल विशेष परिस्थितियों—जैसे परिवार में मृत्यु, गंभीर बीमारी या अन्य अपरिहार्य कारण—को ही मान्य माना जाएगा।
इसके अलावा, बार-बार तारीख लेने पर भी रोक लगा दी गई है। ‘फ्रेश मामलों’ में एडजर्नमेंट की अर्जी केवल एक बार ही स्वीकार की जाएगी और लगातार दो बार सुनवाई टालने की अनुमति नहीं होगी, चाहे मांग किसी भी पक्ष द्वारा की गई हो। कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया है कि एडजर्नमेंट की अर्जी निर्धारित प्रारूप (Annexure-A) में ही दी जाए और तय ईमेल आईडी पर भेजी जाए।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे लंबित मामलों के बोझ को कम करने और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद
‘तारीख पर तारीख’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अब बेहद जरूरी हालात में ही टलेगी सुनवाई


