नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आई-पैक कार्यालय पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को गंभीर बहस देखने को मिली। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटनाक्रम एक चौंकाने वाला और खतरनाक पैटर्न दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब-जब वैधानिक संस्थाएं कानून के तहत अपनी कार्रवाई करती हैं, तब-तब मुख्यमंत्री का प्रत्यक्ष या परोक्ष हस्तक्षेप सामने आता है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष तुषार मेहता ने दलील दी कि इस तरह के हस्तक्षेप से न केवल केंद्रीय एजेंसियों के काम में बाधा उत्पन्न होती है, बल्कि केंद्रीय बलों और अधिकारियों का मनोबल भी टूटता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त रुख नहीं अपनाया गया, तो राज्य सरकारों को यह संदेश जाएगा कि वे जांच एजेंसियों के कार्य में हस्तक्षेप कर सकती हैं, अनियमितताएं कर सकती हैं और बाद में धरना या दबाव की राजनीति कर सकती हैं।
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में स्पष्ट उदाहरण स्थापित किया जाए और घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों को निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि आई-पैक कार्यालय से आपत्तिजनक सामग्री मिलने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। साथ ही कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया कि जिन अधिकारियों के पास प्रत्यक्ष अधिकार हैं, उन्हें तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं और पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया जाए।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार के निलंबन की मांग की है। ईडी ने आरोप लगाया है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और जानबूझकर बाधा डाली। एजेंसी ने कर्मचारी एवं प्रशिक्षण विभाग और गृह मंत्रालय को निर्देश देने की भी मांग की है, ताकि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सके।
यह पूरा मामला 8 जनवरी की घटना से जुड़ा है, जब ईडी ने कोलकाता के सॉल्ट लेक क्षेत्र में आई-पैक कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर कथित कोयला तस्करी मामले में छापेमारी की थी। ईडी का आरोप है कि छापे के दौरान उसके अधिकारियों के कार्य में बाधा डाली गई और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं। एजेंसी का दावा है कि जांच से जुड़े अहम दस्तावेज और सबूत अपने साथ ले जाए गए। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। तृणमूल कांग्रेस ने भी जांच में रुकावट डालने के आरोपों से इनकार किया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना और संकेत दिए कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में बाधा और संवैधानिक संस्थाओं के टकराव जैसे मुद्दों पर कानून के दायरे में संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है।






