कायमगंज (फर्रुखाबाद)। जब भी कायमगंज की सामाजिक, धार्मिक और मानवीय सेवा की बात होती है, तो एक नाम बिना शोर किए सामने आता है—आदरणीय सत्य प्रकाश अग्रवाल जी। प्रमुख उद्योगपति होने के साथ-साथ सी पी इंटरनेशनल ग्रुप एवं ज्ञान डेयरी के संस्थापक सत्य प्रकाश अग्रवाल जी ने जिस तरह अपने कर्मों से समाज की सेवा की है, वह उन्हें केवल उद्योगपति नहीं बल्कि लोकसेवक के रूप में स्थापित करता है।
65 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार—आस्था को मिली नई पहचान
कायमगंज क्षेत्र में करीब 65 मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर सत्य प्रकाश अग्रवाल जी ने सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा दी है। जर्जर अवस्था में पड़े मंदिरों को उन्होंने न सिर्फ पुनर्जीवित कराया, बल्कि उन्हें श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और भव्य स्वरूप प्रदान किया। यह कार्य किसी प्रचार या शिलापट्ट के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा और कर्तव्यभाव से किया गया।
अटैना घाट से लेकर पांचाल घाट तक धार्मिक स्थलों के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इसी क्रम में भव्य नारायण आश्रम जैसे संस्थानों को जनता को समर्पित कर उन्होंने कायमगंज को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। आज यह क्षेत्र साधु-संतों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
सिर्फ बड़े संस्थान ही नहीं, बल्कि कायमगंज की अनेक गलियों को अपने निजी संसाधनों से बनवाकर सत्य प्रकाश अग्रवाल जी ने यह साबित किया कि विकास का अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम है। जिन मोहल्लों में वर्षों से कीचड़ और टूटी सड़कें लोगों की परेशानी बनी थीं, वहां आज पक्की गलियां राहत का प्रतीक बन चुकी हैं।
सबसे विशेष बात यह है कि सत्य प्रकाश अग्रवाल जी की सेवा किसी खास दिन या अवसर तक सीमित नहीं है। रोज़ सुबह उठते ही जरूरतमंदों की मदद करना उनके जीवन का स्वभाव बन चुका है। आर्थिक सहायता हो, भोजन हो या किसी संकट में साथ—वे बिना भेदभाव और बिना दिखावे के हर संभव सहयोग करते हैं।
प्रचार से दूर, प्रेरणा के केंद्र
आज के समय में जब सेवा भी अक्सर प्रचार का माध्यम बन जाती है, ऐसे दौर में सत्य प्रकाश अग्रवाल जी कैमरे और मंच से दूर रहकर समाज के लिए काम कर रहे हैं। न कोई पोस्टर, न कोई बैनर—उनका असली परिचय उनके कार्य हैं, जो कायमगंज की गलियों, घाटों, मंदिरों और जरूरतमंद चेहरों पर साफ दिखाई देता है।
सत्य प्रकाश अग्रवाल जी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्ची समृद्धि वही है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उद्योग, धर्म, संस्कृति और मानवता—चारों क्षेत्रों में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत और आदर्श बना रहेगा।
कायमगंज को उन पर गर्व है—और समाज को ऐसे ही निस्वार्थ कर्मयोगियों की जरूरत है।






