हर खिलाडी के रनों पर प्रति रन रुपये के हिसाब से लग रहा सट्टा
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। टी20 वल्र्डकप के शुरू होते ही जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों में सट्टेबाजी का बाजार गर्म हो गया है। क्रिकेट प्रेमियों के बीच जहां मैचों को लेकर उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर सटोरियों की सक्रियता भी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार टीमों की जीत-हार से लेकर खिलाडिय़ों के प्रदर्शन तक पर बड़े पैमाने पर दांव लगाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 7 फरवरी को शुरू हुए टी20 वल्र्डकप के पहले मैच के साथ ही सट्टा कारोबारियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी थीं। 8 मार्च को होने वाले फाइनल मैच तक यह सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान लाखों ही नहीं बल्कि करोड़ों रुपये सट्टे के रूप में लगाए जाने की चर्चाएं हैं।
जानकारी के मुताबिक सट्टेबाज केवल मैच के परिणाम पर ही नहीं, बल्कि किस खिलाड़ी द्वारा कितने रन बनाए जाएंगे, कौन कितने विकेट लेगा और मैच में कौन ‘मैन ऑफ द मैच’ बनेगा, जैसे बिंदुओं पर भी दांव लगवा रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप के जरिए भी सट्टेबाजी का नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि प्रशासन की सख्ती के बावजूद सट्टा कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। शासन द्वारा समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं कि अवैध सट्टेबाजी पर कड़ी कार्रवाई की जाए, लेकिन इसके बावजूद सटोरियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
कुछ लोगों का आरोप है कि पुलिस की ओर से अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही, जिसके कारण सट्टा संचालक बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
सट्टेबाजी का सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। आसान पैसे के लालच में कई युवा इस अवैध कारोबार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को भी जन्म देती है।
समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सट्टेबाजी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो यह अवैध कारोबार और अधिक फैल सकता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर सट्टा संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि खेल की आड़ में चल रहे इस गैरकानूनी कारोबार पर रोक लग सके।
फिलहाल टी20 वल्र्ड कप के रोमांच के बीच सट्टा बाजार की हलचल भी चरम पर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।




