– पाकिस्तानी नागरिकों की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा
– अवैध हस्तांतरण और राजस्व अभिलेखों में किया गया है हेर-फेर
मोहम्मद आकिब खांन, फर्रुखाबाद
यूथ इंडिया संवाददाता। फर्रुखाबाद की कायमगंज में शत्रु संपत्ति को लेकर एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। विभाजन के समय और उसके बाद पाकिस्तान की नागरिकता लेने वाले व्यक्तियों की बेशकीमती जमीनों पर भू-माफियाओं ने राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अवैध कब्जा कर लिया है। अब प्रशासन ने इस पूरे खेल को उजागर करने के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
जांच में सामने आया है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसी संपत्तियां मौजूद हैं, जिनके मालिक दशकों पहले भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन जा चुके हैं। शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत इन संपत्तियों का मालिकाना हक भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक के पास सुरक्षित होता है। नियमानुसार, इन जमीनों की न तो खरीद-फरोख्त की जा सकती है और न ही इन्हें विरासत के रूप में किसी को हस्तांतरित किया जा सकता है।
बावजूद इसके, स्थानीय स्तर पर राजस्व अभिलेखों में हेर-फेर कर कई जगहों पर इन बेशकीमती जमीनों को निजी हाथों में बेचने के मामले सामने आए हैं।
शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के स्पष्ट उल्लंघन के इस मामले में फर्जी वरासत के जरिए सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द किया गया है। इन जमीनों पर वर्तमान में अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अवैध हस्तांतरण को निरस्त कर संपत्ति सरकार के अधीन ली जाएगी।
पाकिस्तानी नागरिकों के स्वामित्व वाली भूमि की हुई अवैध बिक्री
तहसील क्षेत्र के ग्राम हमीरपुर खास में ‘शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968’ की धज्जियां उड़ाते हुए राजस्व अभिलेखों में गंभीर हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से पाकिस्तानी नागरिकों के स्वामित्व वाली बेशकीमती भूमि को षड्यंत्र के तहत अवैध रूप से खुर्द-बुर्द किया जा रहा है।
मामला गाटा संख्या 346मि०, 347मि०, 348, 354, 355, 356, 357 और 360मि० से जुड़ा है। दस्तावेजों के अनुसार, इन जमीनों की विधिक पहचान छिपाने के लिए लंबे समय से “कागजी खेल” खेला जा रहा था। वर्ष 1982 में पाकिस्तानी नागरिक उमराव अली खां उर्फ सरवर अली खां द्वारा भूमि का विक्रय पत्र निष्पादित किया गया। जबकि शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत, किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को भारतीय क्षेत्र में संपत्ति हस्तांतरण का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके अलावा मु० न्यामतजान बेगम के निधन के बाद, उनकी संपत्ति के वास्तविक वारिस उनके पुत्र अफसर अली खां थे, जो एक पाकिस्तानी नागरिक हैं। आरोप है कि मुख्य वारिस का नाम छिपाकर एक सोची-समझी साजिश के तहत रफत अली खां, शफ़क़त अली खां और विजारत अली खां के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा दिए गए। इसके पश्चात उक्त भूमि को अवैध रूप से बेच दिया गया। शत्रु संपत्ति अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, देश छोड़कर जा चुके (विशेषकर पाकिस्तान या चीन) नागरिकों की संपत्ति ‘कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया’ के अधीन होती है। इस मामले में न केवल अधिनियम का उल्लंघन हुआ है, बल्कि फर्जीवाड़ा कर सरकारी अभिलेखों में भी छेड़छाड़ की गई है।






