16 C
Lucknow
Saturday, January 24, 2026

व्यंग्य: अथश्री श्वान स्तुति कथा

Must read

(सुधाकर आशावादी-विनायक फीचर्स)

कहावत है कि न जाने कब किस वेश में नारायण मिल जाएंगे। धार्मिक आस्था में आम आदमी हर जीव में परमात्मा के दर्शन पाने का प्रयास करता ही है। वृक्ष, नदी, पर्वत की पूजा करता है। महाभारत युद्ध (mahabharata warके उपरांत पांडवों की स्वर्गारोहण कथा में प्रसंग आता है, कि धर्मराज युधिष्ठिर के साथ एक वफादार श्वान स्वर्ग द्वार पर पहुँच जाता है।

स्वर्ग में प्रवेश हेतु युधिष्ठिर ने श्वान को त्यागने से इंकार कर दिया, श्वान धर्मराज के रूप में प्रकट हुए तथा युधिष्ठिर की निस्वार्थ सेवा भावना तथा सभी प्राणियों के प्रति दयालुता की अंतिम परीक्षा में सफल हुए, जिस आधार पर युधिष्ठिर एवं श्वान ने सशरीर स्वर्ग में प्रवेश किया।

इस प्रसंग में सत्य कितना है, यह नहीं कहा जा सकता, अलबत्ता उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में निरंतर बहत्तर घंटे एक कुत्ते ने बजरंग बली हनुमान जी एवं माँ दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा की, सोशल मीडिया के युग में इस परिक्रमा का वीडियो वायरल हुआ, भक्तों ने इस क्रिया को चमत्कार की संज्ञा दी, फिर क्या था, भक्त कुत्ते को भैरव बाबा का अवतार मानने लगे।

मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी, मंदिर पर मेला लगा, दुकानें सजी, भक्तों ने दिल खोलकर दान किया, भंडारे आयोजित किये गए। कुत्ते के शयन की व्यवस्था की गई। गर्म रजाई तथा अन्य व्यवस्था की गई। महिलाओं ने शयन मुद्रा में कुत्ते की चरण वंदना करके अपने परिवार की समृद्धि की कामना की।

विज्ञान के युग में किसी ने इसे अंधविश्वास की संज्ञा दी, तो पशु चिकित्सक कुत्ते का स्वास्थ्य परीक्षण करने दौड़े, स्वास्थ्य परीक्षण में कुत्ते के स्वास्थ्य को सामान्य पाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसके द्वारा की गई मूर्तियों की परिक्रमा को फ्रंट ब्रेन डिसऑर्डर (मस्तिष्क संबंधी समस्या) या किसी बीमारी से जुड़ा व्यवहार बताकर अन्य आधुनिक परीक्षण कराने की सिफारिश कर दी।

बहरहाल यह सत्य पुनः स्थापित हुआ कि किसी भी प्राणी का भाग्य न जाने कब पलट जाए, गली के जिस कुत्ते को कोई अपने घर की दहलीज पर खड़ा नहीं होने देता, वही कब उसी कुत्ते को पूज्य मानकर उसकी स्तुति करने लगे। भारत में ऐसे चमत्कारों की कमी नहीं है। कभी मंदिरों में किसी मूर्ति को दूध पिलाने की होड़ मचती है। कभी किसी गाय को किसी मंदिर में मूर्ति के सम्मुख शीश नवाते हुए वीडियो सामने आता है। दिन सबके बदलते हैं, एक समय ऐसा आता है, कि उपेक्षित चरित्र की भी स्तुति की जाती है। श्रीमान श्वान जी अर्थान कुत्ते जी की स्तुति का प्रसंग यही सिद्ध करता है।

(विनायक फीचर्स)

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article