फर्रुखाबाद। जनपद में शीतलहर का प्रकोप लगातार जारी है। रविवार को दिन में धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर महसूस हुई, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण गलन बरकरार रही। सुबह और शाम का तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ठंड का असर इतना तीखा है कि खुले में निकलना लोगों के लिए कठिन होता जा रहा है।
कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और बच्चों पर देखा जा रहा है। बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द और सर्दी-खांसी की शिकायत बढ़ रही है, वहीं छोटे बच्चे भी मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ठंड के कारण लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर बाजारों पर भी पड़ा है, जहां सामान्य दिनों की तुलना में रौनक कम नजर आ रही है।
इधर, ठंड के साथ-साथ प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। सुबह के समय धुंध और प्रदूषण की परत शहर पर छाई रहती है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है। बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस संबंधी रोगों का खतरा भी बढ़ गया है। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में अस्थमा, एलर्जी और सांस की तकलीफ से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ठंडी हवा और प्रदूषित वातावरण मिलकर स्वास्थ्य के लिए दोहरी चुनौती बन रहे हैं।
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय कोल्ड वेव की तीव्रता अधिक बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते मैदानी इलाकों में ठंड का असर बना हुआ है। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है। फिलहाल ठंड से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
मौसम विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अलाव का सहारा लें, गर्म कपड़े पहनें और सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखने की आवश्यकता है। बदलते मौसम के बीच सावधानी और सतर्कता ही इस ठंड से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।




