लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व आंकड़ों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की वित्तीय सेहत को सबसे ज्यादा सहारा शराब की बिक्री से मिलने वाली आय दे रही है। जहां एक तरफ जीएसटी की दरें कम होने से वाणिज्य कर विभाग को भारी नुकसान झेलना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग ने रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज करते हुए इस नुकसान की लगभग पूरी भरपाई कर दी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में शराब बिक्री से होने वाला राजस्व प्रदेश की आय का प्रमुख आधार बनकर उभरा है।
नवंबर माह में जीएसटी दरों में कटौती और बाजार में सुस्ती के चलते पिछले वर्ष की तुलना में 320.89 करोड़ रुपये का सीधा राजस्व घाटा सामने आया। इससे कर विभाग की चिंता बढ़ी, क्योंकि व्यवसायिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा प्रदेश के कुल राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। लेकिन इस गिरावट के समानांतर आबकारी विभाग के आंकड़ों ने सरकार को राहत की सांस दी। नवंबर 2024 में अकेले शराब की बिक्री से 4,486.49 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई, जो पिछले वर्ष नवंबर के 4,071.47 करोड़ रुपये की तुलना में 10.19 प्रतिशत अधिक रही।
सरकार के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण शराब कारोबार में पारदर्शिता लाना, कर चोरी पर सख्त नकेल कसना और अवैध शराब के खिलाफ व्यापक अभियान चलाना है। आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस साल नवंबर तक प्रदेश 35,144.11 करोड़ रुपये का कुल राजस्व अर्जित कर चुका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आय 30,402.34 करोड़ रुपये थी। यानी पिछले साल के मुकाबले राजस्व में करीब 4,741.77 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अवैध शराब के खिलाफ सरकार ने इस वर्ष अभूतपूर्व अभियान चलाया है। अक्टूबर तक प्रदेश भर में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी से जुड़े 70,017 अभियोग दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान 18.5 लाख लीटर अवैध मदिरा बरामद की गई, जबकि 13,243 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनमें से 2,464 लोगों को जेल भेजा गया, और तस्करी में प्रयुक्त 94 वाहन जब्त किए गए। प्रदेश सरकार का दावा है कि इन कठोर कदमों से न केवल अवैध कारोबारी नेटवर्क कमजोर हुआ है, बल्कि वैध लाइसेंसधारी दुकानों की बिक्री भी बढ़ी है, जिससे राजस्व में सुधार हुआ है।
राजस्व विशेषज्ञों का कहना है कि एक ओर जीएसटी संग्रह में कमी भविष्य में चिंता का विषय बन सकती है, वहीं शराब से होने वाली अभूतपूर्व आय सरकार की आर्थिक स्थिति को फिलहाल मजबूती दे रही है। हालांकि यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या किसी राज्य की वित्तीय निर्भरता शराब जैसे उत्पादों पर इस स्तर तक बढ़नी चाहिए।
फिलहाल सरकार ने संकेत दिए हैं कि जीएसटी राजस्व में सुधार के लिए व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, नई औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करने और कर संग्रह प्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, जबकि अवैध शराब पर कार्रवाई और भी तेज होगी ताकि आबकारी राजस्व के आंकड़े निरंतर बढ़ते रहें।






