कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती फर्रुखाबाद द्वारा नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
बैठक का शुभारंभ संस्कार भारती गीत ध्येय गाकर किया गया। उसके उपरांत प्रांतीय विधा प्रमुख (धरोहर कला) श्री अखिलेश पांडेय ने श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि श्री पांडेश्वर नाथ .उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में स्थित श्री पांडेश्वर नाथ मंदिर एक प्राचीन पौराणिक स्थल है, जिसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपनी माता कुंती की प्रेरणा से, भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी। इस पवित्र शिवालय में एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन होते हैं।
राष्ट्रीय कवि श्री शिव ओम अंबर जी ने नव संवत्सर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि )। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष उस दिव्य क्षण की स्मृति का प्रतीक है, जब सृष्टिकर्ता चतुरानन ब्रह्मा ने इस जगत की रचना का शुभारंभ किया था। इस दृष्टि से यह दिन सृष्टि के नवप्रभात का उत्सव है, जिसमें प्रकृति भी अपने नवीन रूप में उल्लासपूर्वक जाग्रत होती प्रतीत होती है। ऋतु परिवर्तन के साथ जब वसंत का सुहावना स्पर्श धरती को आलोकित करता है, वृक्षों में नवपल्लव फूटते हैं, खेत-खलिहानों में हरितिमा का विस्तार होता है और वातावरण में एक नवीन प्राणशक्ति का संचार होता है, तब यह नवसंवत्सर मानव जीवन में भी नूतन उत्साह, उमंग और आत्मचेतना का संदेश लेकर आता है।
अंत में अध्यक्ष श्री अनिल प्रताप सिंह जी ने सभी का धन्यवाद दिया।
बैठक का संचालन सचिव श्री गौरव मिश्रा जी ने किया।
बैठक के प्रमुख रूप से श्री समेंद शुक्ल कवि,शिव ओम अंबर, अरविंद दीक्षित सुबोध शुक्ला, नवीन मिश्र नब्बू भाई, अमन अवस्थी, श्री नरेंद्र नाथ, विशाल श्रीवास्तव, अनुभव सारस्वत , विशाल श्रीवास्तव, नवनीत गुप्ता, अनुराग अग्रवाल, रामजी बाजपेई, अनुराग पाण्डेय, रवीन्द्र भदौरिया अखिलेश पांडेय, आदि उपस्थित रहे।
संस्कार भारती फर्रुखाबाद: नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर में हुई गोष्ठी।


