बोले, “जो बाबर के साथ खड़ा होगा, उसके साथ वैसा ही व्यवहार होगा”
हरिद्वार/उत्तराखंड। पश्चिम बंगाल के टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद की नींव रखने’ के ऐलान ने विवाद को गरमा दिया है। अब उत्तराखंड स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी भरा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “जो व्यक्ति बाबर के साथ खड़ा होगा, उसके साथ वही व्यवहार होगा जो बाबर के साथ होना चाहिए।”
शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि बाबर भारत के लिए एक आक्रांता था और यदि कोई व्यक्ति बाबर से जुड़कर अपनी पहचान बताता है तो उसे भी “आक्रांता” की श्रेणी में ही रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इतिहास में बाबर ने जो अत्याचार किए, वह देश के लिए पीड़ादायक स्मृतियाँ हैं, इसलिए उसके समर्थन में खड़ा होने वालों के प्रति भी समाज का रवैया कठोर होना स्वाभाविक है।
टीएमसी विधायक के विवादित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने दोहराया कि “बाबर के साथ जो खड़ा होगा, उसे बाबर ही समझा जाएगा। और आज बाबर के साथ जैसा व्यवहार होना चाहिए, वही किया जाएगा।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद बनाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन “बाबर के नाम पर मस्जिद स्वीकार्य नहीं” है।
धार्मिक स्थलों के विवाद पर आगे बोलते हुए शंकराचार्य ने मुसलमानों से मथुरा और काशी के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उपासना स्थल तोड़ा जाना धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से हुआ था, जबकि इस्लाम में किसी दूसरे धर्मस्थल को तोड़कर अपनी इबादतगाह बनाना उचित नहीं माना गया है।
उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक कारणों से की गई ऐतिहासिक गलतियों को धार्मिक पहचान बनाकर रखा जाएगा तो विवाद कभी समाप्त नहीं होंगे। इसलिए मुस्लिम समाज को अपने मजहब की शिक्षाओं के अनुसार आत्ममंथन करना चाहिए।
शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, हालांकि टीएमसी विधायक की टिप्पणी पर पार्टी पहले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुकी है।






