– पॉक्सो कोर्ट सख्त, बच्चों के यौन शोषण मामले में विस्तृत जांच के निर्देश
प्रयागराज। प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद तथा मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बच्चों के कथित यौन शोषण मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया प्रस्तुत साक्ष्यों और पीड़ित पक्ष के बयानों को गंभीर मानते हुए पुलिस को विधि के अनुरूप कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि प्रकरण बच्चों से जुड़े गंभीर आरोपों का है, इसलिए इसे पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जाए। कोर्ट ने स्थानीय पुलिस को निर्देशित किया है कि पीड़ितों के बयान धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जाएं।
मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जाएं।
किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी पर जिम्मेदारी तय की जाए।
आरोप क्या हैं?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाबालिग बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार और यौन शोषण की घटनाएं हुईं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, कई मौकों पर बच्चों के साथ गंभीर आपत्तिजनक कृत्य किए गए। पुलिस रिपोर्ट और प्रारंभिक तथ्यों में आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताया गया है।
भारत में वर्ष 2024-25 के दौरान बच्चों के खिलाफ अपराध के 1 लाख से अधिक मामले विभिन्न राज्यों में दर्ज हुए।
उत्तर प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या देश में सबसे अधिक रहने वाले राज्यों में शामिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालतों की सक्रियता और शिकायत दर्ज कराने के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में वृद्धि हो रही है।
कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष ढंग से की जाएगी और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में अदालतें “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाती हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि चाहे आरोपी कोई भी हो, कानून से ऊपर कोई नहीं। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।
(नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।)

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