नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने अमेरिका–ईरान वार्ता में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर कहा कि इससे भारत की वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
संजय सिंह ने कहा कि भारत लंबे समय से खुद को एक उभरती वैश्विक शक्ति और मजबूत कूटनीतिक देश के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। ऐसे में यदि किसी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वार्ता में पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ की भूमिका मिलती है, तो यह भारत की स्थिति को कमजोर दर्शाता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी क्यों नहीं दिख रही।
सांसद ने नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने रहें, लेकिन केवल लोकप्रियता ही किसी देश की वैश्विक ताकत का पैमाना नहीं हो सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी भूमिका निभाने के लिए ठोस कूटनीतिक हस्तक्षेप, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर निर्णायक उपस्थिति जरूरी होती है।
संजय सिंह ने यह भी कहा कि भारत को उन वैश्विक मुद्दों पर अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, जहां उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित जुड़ा हो। उन्होंने जोर दिया कि भारत की विदेश नीति केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर वास्तविक प्रभाव पैदा करने वाली होनी चाहिए।
इस बयान के बाद देश में विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष जहां सरकार की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार की ओर से अक्सर यह कहा जाता रहा है कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र, संतुलित और बहुपक्षीय है, और देश वैश्विक मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
संजय सिंह ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए मुद्दे


