
हर वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की उस ऊर्जा, संकल्प और संभावना का प्रतीक है जिसे हम युवा शक्ति कहते हैं। यह दिन उस महान चिंतक, दार्शनिक और राष्ट्रनिर्माता स्वामी विवेकानंद की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिनका विश्वास था “मुझे सौ ऊर्जावान युवा दे दो, मैं भारत का भाग्य बदल दूँगा।”
आज जब भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, तब यह कथन केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी बन जाता है।
युवा: सिर्फ उम्र नहीं, एक चेतना
युवा होना केवल आयु की अवस्था नहीं है, यह सोचने का तरीका है। प्रश्न करने का साहस, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की हिम्मत और भविष्य को बेहतर बनाने का जुनून—यही युवा चेतना है। इतिहास गवाह है कि जब-जब देश ने दिशा बदली, उसमें युवाओं की निर्णायक भूमिका रही है—चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो, सामाजिक सुधार आंदोलन हों या आधुनिक भारत का निर्माण।
आज का युवा डिजिटल है, जागरूक है और वैश्विक दृष्टि रखता है। लेकिन इसके साथ ही उसके सामने चुनौतियाँ भी उतनी ही गंभीर हैं—बेरोजगारी, मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, और मूल्यहीनता का संकट।
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र और राष्ट्रसेवा का मंत्र दिया। वे कहते थे कि कमजोर व्यक्ति कभी राष्ट्र नहीं बना सकता। आज के संदर्भ में यह विचार और भी प्रासंगिक हो जाता है, जब युवा सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में उलझकर वास्तविक मुद्दों से दूर होता जा रहा है।
राष्ट्रीय युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि तकनीक का उपयोग साधन के रूप में हो, लक्ष्य के रूप में नहीं।
राष्ट्रनिर्माण में युवाओं की भूमिका
आज भारत जिन क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है—स्टार्टअप, विज्ञान, तकनीक, खेल, स्वास्थ्य, रक्षा—उन सभी की धुरी युवा ही हैं। लेकिन केवल सफलता की कहानियाँ ही पर्याप्त नहीं हैं। जरूरी है कि युवा संवेदनशील भी हो, सामाजिक भी हो और जिम्मेदार नागरिक भी बने।
युवा यदि प्रश्न पूछता है, तो लोकतंत्र मजबूत होता है। युवा यदि अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, तो समाज सुधरता है।
और युवा यदि दिशा भटकता है, तो राष्ट्र को उसका मूल्य चुकाना पड़ता है।
आज के दिन का असली अर्थ
राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य सिर्फ भाषण, कार्यक्रम और नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह आत्ममंथन का दिन है
क्या हम युवाओं को केवल भीड़ मान रहे हैं या नेतृत्व दे रहे हैं?
क्या शिक्षा रोजगार से जुड़ पा रही है?
क्या युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लग रही है?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर ईमानदारी से खोजे जाएँ, तभी यह दिवस सार्थक होगा।
आज भारत का भविष्य कॉलेजों, गांवों, गलियों और स्टार्टअप हब्स में सांस ले रहा है। यदि यह युवा जागरूक, नैतिक और साहसी बना, तो भारत को कोई शक्ति रोक नहीं सकती।
स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी पथप्रदर्शक हैं उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।
राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यही याद दिलाता है कि युवा केवल भविष्य नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति है।
और यदि यह शक्ति सही दिशा में चल पड़ी, तो भारत का स्वर्णिम अध्याय कोई सपना नहीं, सच्चाई बन जाएगा।
(लेखक यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप के संस्थापक हैं)






