नोएडा और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर बना गौतमबुद्ध नगर आज उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। राज्य के कुल राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देने वाला यह जिला उद्योग, सेवा क्षेत्र और कारोबार का बड़ा केंद्र है। ऐसे में यहां फर्जी और कागजी कंपनियों का जाल सामने आना न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि कर व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 के बीच महज आठ महीनों में जिले की 2254 कंपनियों का जीएसटी पंजीकरण रद्द कर दिया गया। यह कार्रवाई टैक्स चोरी, फर्जीवाड़े और लंबे समय से निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ चलाई गई सख्त मुहिम का परिणाम बताई जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह कदम व्यवस्था को दुरुस्त करने की स्थायी पहल है या फिर वर्षों से पनप रही खामियों पर एक तात्कालिक मरहम?
राज्य कर विभाग के अनुसार इसी अवधि में जिले में 22,294 नई कंपनियों का जीएसटी पंजीकरण हुआ। इनमें से 11,474 राज्य जीएसटी और 10,820 केंद्रीय जीएसटी के तहत दर्ज की गईं। आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल 20,040 से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि शेष का पंजीकरण अनियमितताओं के चलते समाप्त कर दिया गया।
यह तस्वीर साफ करती है कि एक ओर नए कारोबार तेजी से सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में कंपनियां ऐसी हैं, जो केवल कागजों पर ही अस्तित्व में थीं।
कागजी कंपनियों का सच
जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि दो हजार से अधिक कंपनियां वास्तविक रूप से संचालित ही नहीं हो रही थीं। कुछ ने महीनों तक जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किए, तो कुछ लगातार शून्य रिटर्न जमा कर रही थीं। कई मामलों में कंपनियों का वास्तविक कारोबार बंद हो चुका था, लेकिन पंजीकरण चालू रखा गया था, ताकि फर्जी लेन-देन या इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा सके।
यह स्थिति दर्शाती है कि केवल पंजीकरण प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उसके बाद की निगरानी भी लंबे समय तक कमजोर रही।
औद्योगिक जिले में बड़ी चुनौती
गौतमबुद्ध नगर में इस समय करीब 1.25 लाख कंपनियां जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, मशीनरी, मोबाइल और सेवा क्षेत्र से जुड़ी हजारों इकाइयों के बीच फर्जी कंपनियों का पनपना यह बताता है कि बड़े कारोबारी केंद्रों में टैक्स चोरी के तरीके भी उतने ही संगठित और जटिल होते जा रहे हैं।
विभाग के लिए यह सिर्फ राजस्व का नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का भी सवाल है।
सरकार और अफसरों की सख्ती
प्रदेश की प्रमुख सचिव जीएसटी कामिनी रतन चौहान के निर्देश पर कागजी कंपनियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पंजीकरण निरस्तीकरण के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई भी तेज की गई है।
नोएडा के अपर आयुक्त राज्यकर संदीप भागिया के अनुसार नई पंजीकृत कंपनियों में से लगभग 10 प्रतिशत का जीएसटी पंजीकरण समाप्त किया गया है। उनका कहना है कि सरकार के निर्देश पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि टैक्स चोरी से होने वाले राजस्व नुकसान को रोका जा सके।
निष्कर्ष: स्थायी सुधार की जरूरत
फर्जी कंपनियों पर यह कार्रवाई निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसी कंपनियों को पनपने से रोका जा सकेगा? केवल पंजीकरण रद्द करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है मजबूत सत्यापन प्रणाली, रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स और नियमित फील्ड जांच की।
यदि यह अभियान निरंतर और पारदर्शी रूप से चलता रहा, तो न सिर्फ राजस्व में बढ़ोतरी होगी, बल्कि ईमानदार कारोबारियों का भरोसा भी मजबूत होगा। अन्यथा, यह कार्रवाई भी फर्जी कंपनियों के लंबे इतिहास में एक और अध्याय बनकर रह जाएगी।

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