फर्रुखाबाद। बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी को राहत मिलने के बाद सियासी माहौल गर्मा गया है। कांग्रेस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ईडी की पूरी कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर की गई है।
इसी क्रम में फर्रुखाबाद में भी कांग्रेस ने बीजेपी कार्यालय के घेराव का ऐलान किया। गुरुवार को कांग्रेस नगर अध्यक्ष अंकुर मिश्रा के आवास पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यहां से बीजेपी कार्यालय घेरने की रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार करना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस नेतृत्व को बेवजह परेशान किया जा रहा था।
कांग्रेस के घेराव की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। सीओ सिटी ऐश्वर्या उपाध्याय के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस फोर्स कांग्रेस नगर अध्यक्ष के आवास पर पहुंच गई। पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कुछ दूर चलने के बाद आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे बीजेपी कार्यालय तक घेराव नहीं हो सका।
पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज कांग्रेसी नगर अध्यक्ष के आवास के बाहर ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान नारेबाजी भी की गई। मौके पर अर्चना राठौर, पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय शर्मा सहित कई कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। पुलिस ने किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए नगर अध्यक्ष के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
हालांकि इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस संगठन की अंदरूनी स्थिति भी खुलकर सामने आई। जिलाध्यक्ष शकुंतला गौतम प्रदर्शन में नजर नहीं आईं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। वहीं शहर अध्यक्ष अंकुर मिश्रा ने इस पूरे मामले में मीडिया से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
इसके अलावा कांग्रेस नेता शुभम तिवारी, जिनका आवास शहर अध्यक्ष के घर के निकट है, वे भी प्रदर्शन के दौरान दिखाई नहीं दिए। इसी तरह कांग्रेस नेता वरुण त्रिपाठी भी नदारद रहे, जिसे लेकर पार्टी की आपसी खींचतान और गुटबाजी एक बार फिर उजागर हो गई।
कुल मिलाकर नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर फर्रुखाबाद की सियासत में उबाल देखने को मिला। जहां एक ओर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और ईडी पर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सख्ती के चलते घेराव की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के आंदोलन को और तेज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।






