17 C
Lucknow
Monday, February 16, 2026

मतदाता सूची में मृतकों और फर्जी नामों का जाल—लोकतंत्र की आत्मा पर सबसे बड़ा प्रहार

Must read

लखनऊ की विशेष पुनरीक्षण रिपोर्ट ने खोली राष्ट्रव्यापी सत्य की परतें—अब पूरे देश में मतदाता शुचिता अभियान की आवश्यकता

दश की निर्वाचन व्यवस्था केवल चुनावों से नहीं चलती—इसकी आत्मा मतदाता सूची में बसती है। जब मतदाता सूची ही मृतकों, दोहराए गए नामों और अस्तित्वहीन प्रविष्टियों से भर जाए, तो लोकतंत्र की पवित्रता स्वतः संदिग्ध हो जाती है।लखनऊ में विशेष पुनरीक्षण द्वारा उजागर हुआ तथ्य यह बताने के लिए पर्याप्त है कि देश की मतदाता संरचना कितनी गहरी अव्यवस्था से गुजर रही है।

राजधानी में एक लाख छब्बीस हज़ार मृतकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए। यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं; यह संकेत है कि वर्षों से मतदाता सूची नाम मात्र की जाँच पर निर्भर रही।

इसके साथ ही पैंतालीस हज़ार दोहराए गए नाम मिलने से यह स्पष्ट होता है कि मतदाता सूची का दुरुपयोग करने वालों को खुली छूट मिली हुई थी।

यह केवल लखनऊ का मामला नहीं—यह तो पूरे देश में फैले एक मौन संकट का उद्घाटन है।

रिपोर्ट में पाँच लाख बारह हज़ार ऐसे मतदाता मिले, जिनके पते बदल चुके हैं या वे अपने पुराने निवास पर उपलब्ध नहीं हैं।

यह संख्या बताती है कि इतने वर्षों में मतदाता सूची को अद्यतन करने की जिम्मेदारी केवल कागज़ों पर निभाई गई, ज़मीन पर नहीं।

ऐसी त्रुटियाँ चुनाव को सीधे प्रभावित करती हैं।

मतदाता संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है,

निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलन बिगड़ता है,मतगणना का वास्तविक स्वरूप धूमिल हो जाता है,

और लोकतंत्र की विश्वसनीयता को ठोस चोट पहुँचती है।

लोकतंत्र में मतदाता की पहचान ही उसकी शक्ति है—यदि पहचान ही संदिग्ध हो जाए, तो जनादेश कैसे पवित्र माना जा सकता है।

लखनऊ की रिपोर्ट केवल एक प्रारंभ है।अब देशभर में व्यापक जाँच और सुधार अनिवार्य है—

मृतक नामों का तत्काल निष्कासन,

दोहराई गई प्रविष्टियों का शुद्धिकरण,विस्थापित मतदाताओं का पुनः सत्यापन,और घर-घर जाकर पूर्ण सूची संशोधन।

यह कार्य केवल प्रशासन का नहीं; यह राष्ट्रहित का दायित्व है।

जब मतदाता सूची साफ होगी तभी

सुशासन स्थापित होगा,

पारदर्शी चुनाव होंगे,

और लोकतंत्र में जनता का विश्वास पुनः दृढ़ होगा।

लखनऊ में मृतकों और फर्जी प्रविष्टियों का हटाया जाना केवल शुरुआत है।

अब पूरे देश में फर्जी मतों की काट होगी और लोकतंत्र की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित होगी।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।इतने विशाल लोकतंत्र में यदि मतदाता सूची ही त्रुटिपूर्ण हो, तो चुनावों की पवित्रता संदिग्ध हो जाएगी और राष्ट्र की आवाज़ विकृत हो जाएगी।

इसलिए यह अनिवार्य है कि पूरा देश एक स्वर में कहे—

“सही मतदाता, सही सूची—यही सच्चे लोकतंत्र की नींव है।”

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article