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Wednesday, February 18, 2026

भारत-रूस शिखर वार्ता: शांति की दिशा में निर्णायक कदम

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शरद कटियार

भारत और रूस के बीच हुई ताज़ा शिखर वार्ता सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और संतुलित नेतृत्व का स्पष्ट संकेत है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई मोर्चों पर तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता से जूझ रही है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया संदेश— “भारत निष्पक्ष नहीं, भारत शांति की तरफ है” —आज की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हैदराबाद हाउस में हुई इस मुलाकात ने भारत की जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की छवि को और मजबूत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर स्पष्ट और साहसिक रुख प्रस्तुत किया। यह रुख न केवल मानवता के हित में है, बल्कि यह भारत की उस नीति का भी विस्तार है जिसमें संवाद और कूटनीति को सर्वोपरि रखा जाता है। युद्ध से उपजे आर्थिक, सामाजिक और मानवीय संकटों ने दुनिया को पहले ही अस्थिर कर दिया है। ऐसे समय में भारत की शांति-प्रधान पहल को वैश्विक नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन द्वारा भी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता को स्वीकार करना इस वार्ता को और भी अर्थपूर्ण बनाता है। यह संकेत देता है कि रूस भारत की संतुलित, व्यावहारिक और विश्वसनीय भूमिका को गंभीरता से लेता है। यह वही भूमिका है जिसकी दुनिया को आज सबसे अधिक आवश्यकता है।

द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में भी यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जाएगी। रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को बढ़ाने वाले हैं। विशेष तौर पर एआई, विमानन और अंतरिक्ष मिशनों में संयुक्त पहल आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी ताकत को नया आयाम दे सकती है।

व्यापार और निवेश के मोर्चे पर भी यह दौरा नए अवसरों की ओर संकेत करता है। पुतिन का भारतीय उद्योग जगत से मिलना यह दर्शाता है कि दोनों देश आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के प्रति गंभीर हैं। भारत की बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था और रूस के विशाल ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन—दोनों मिलकर भविष्य की एक मजबूत आर्थिक धुरी का निर्माण कर सकते हैं।

मोदी-पुतिन मुलाकात ने जिस गर्मजोशी, विश्वास और मित्रता का संदेश दिया है, उससे यह साफ है कि भारत-रूस संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होंगे। इस मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यही है—भारत विश्व राजनीति में सिर्फ पर्यवेक्षक नहीं, निर्णायक आवाज बनकर उभर रहा है। एक ऐसी आवाज जो युद्ध नहीं, समाधान की बात करती है। एक ऐसी शक्ति जो तटस्थ नहीं, शांति की पक्षधर है।

दुनिया को आज इसी संतुलन, इसी साहस और इसी नेतृत्व की जरूरत है।हैदराबाद हाउस में हुई यह वार्ता इस दिशा में एक दृढ़, सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

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