अपराध के खिलाफ उत्तर प्रदेश की निर्णायक मुहिम—जिलेवार अभियान में डीजीपी राजीव कृष्ण की सख्त, संवेदनशील और शानदार भूमिका”

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शरद कटियार
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधताओं वाले राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। 75 जिलों वाला यह राज्य जनसंख्या, भूगोल, सामाजिक संरचना और अपराध के पैटर्न के लिहाज़ से बेहद जटिल है। ऐसे में अपराधियों के मन में भय और आम जनता के दिल में भरोसा पैदा करना किसी भी सरकार और पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। बीते कुछ महीनों में डीजीपी राजीव कृष्ण की अगुआई में जिस तरह राज्यभर में जिलेवार सघन अभियान चलाए गए हैं, उसने न केवल अपराध पर नकेल कसी है, बल्कि कानून-व्यवस्था की कार्यशैली में भी एक सकारात्मक बदलाव स्थापित किया है।
प्रदेश के हर जिले में अलग-अलग प्रकार के अपराधों का पैटर्न और उनके कारण मौजूद हैं—कहीं गैंगस्टर, कहीं भूमि माफिया, कहीं साइबर अपराध, तो कहीं नशा तस्करी और महिला अपराध। डीजीपी की रणनीति में पहली बार यह देखा गया कि हर जिले को उसके अपराध के चरित्र के अनुसार “कस्टमाइज्ड ऐक्शन प्लान” सौंपा गया।
जिन जिलों में गैंग सक्रिय थे, वहां गैंगस्टर एक्ट और गैंग चार्ट अपडेट हुए।
भूमि माफिया वाले जिलों में जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए विशेष टास्कफोर्स बनाई गई।
महिलाओँ से जुड़े अपराध वाले इलाकों में पिंक पेट्रोलिंग, शोहदे-विरोधी अभियान और विशेष गिरफ्तारी ड्राइव में तेजी लाई गई।
अपराधियों की संपत्तियों पर बड़ी स्तर पर जप्ती—ध्वस्ती—कुर्की की कार्रवाई ने अपराध जगत को सीधा संदेश दिया कि “अपराध करोगे तो संपत्ति भी नहीं बचेगी।”
राजीव कृष्ण का व्यक्तित्व हमेशा सख्त अफसर के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने सख्त कानून-व्यवस्था और संवेदनशील पुलिसिंग—दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई।
बड़े गैंगों का नेटवर्क तोड़ा गया।
वांछित अपराधियों की डिजिटल ट्रैकिंग से रिकॉर्ड स्तर की गिरफ्तारियां हुईं।
पुराने थानों में लंबित गंभीर मामलों को चिह्नित करके तेजी से निपटाया गया।
महिला हेल्पलाइन 1090 को और सक्रिय करने के साथ-साथ हर जिले में “महिला सुरक्षा बीट” को मजबूती दी गई।
नागरिकों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बीट इंटेलिजेंस सिस्टम सक्रिय किया गया।
छोटे अपराधों में फँसे निर्दोष लोगों को राहत पहुँचाने के लिए काउंसलिंग-आधारित समाधान जोड़े गए।
पश्चिमी यूपी में गैंगस्टर और जमीन कब्जा गिरोहों पर निर्णायक कार्रवाई।
पूर्वी यूपी में नक्सल प्रभावित और बॉर्डर क्षेत्रों में हथियार, शराब और मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ा नियंत्रण।
बुंदेलखंड में अवैध खनन व हथियार तस्करी पर सफल सख्ती।
दिल्ली-एनसीआर से सटे जिलों में चोरी, लूट, वाहन लिफ्टिंग रोकने के लिए स्पेशल व्यवस्था की गई है।
राज्य के कई जिलों में सर्वे बताते हैं कि लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है शिकायतों का निस्तारण समय सीमा में हो रहा है, व्यापारी वर्ग ने खुले तौर पर पुलिस की पहल का स्वागत किया, रात के गश्त, महिला सुरक्षा और इंटेलिजेंस यूनिट की सक्रियता से आमजन खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है यह सकारात्मकता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीन पर बने वातावरण से झलक रही है।
राज्य के पुलिस महानिदेशक की नेतृत्व क्षमता ने यूपी को एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करने में मदद की है, जहाँ “न अपराधी बचे, न अपराध बचा” “नागरिकों की सुरक्षा—सरकार की प्राथमिकता बनी रही” अलग-अलग जिलों की अलग समस्या को अलग समाधान से संबोधित करना एक आधुनिक पुलिसिंग मॉडल है, जिसकी सराहना अन्य राज्यों में भी की जा रही है।
अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश केवल नारा नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित, वैज्ञानिक और जिलेवार रणनीति का परिणाम है। डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में चल रही यह मुहिम प्रदेश में सुरक्षा और सुशासन का नया अध्याय लिख रही है।
आपराधिक मानसिकता पर यह सबसे कड़ा प्रहार है—और जनता के मन में आश्वस्ति का सबसे मजबूत कारण भी।
यह मुहिम जारी रहे—इसी अपेक्षा के साथ।

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