उत्तर प्रदेश: उभरती तकनीकों का नया महाकेंद्र

0
56

शरद कटियार
उत्तर प्रदेश आज जिस तेज़ी और दृढ़ता के साथ तकनीकी बदलावों को अपनाकर खुद को भविष्य की अर्थव्यवस्था का नेतृत्वकर्ता बना रहा है, वह न सिर्फ स्वागतयोग्य है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल भी है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक डेटा सेंटर—इन सभी क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की हालिया प्रगति यह संकेत देती है कि राज्य आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी शक्ति का मजबूत आधार बनने जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने, निवेश आकर्षित करने और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर आज वैश्विक स्तर की आईटी कंपनियों, डेटा सेंटर ऑपरेटरों और टेक स्टार्टअप्स का नया अड्डा बनते जा रहे हैं। विशाल डेटा सेंटर पार्कों के निर्माण से लेकर AI-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल तक—यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर प्रदेश केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक का बड़ा उत्पादक भी बन रहा है।
इमर्जिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई नीतियों ने राज्य में स्टार्टअप्स को नई ऊर्जा दी है। 100 से अधिक ऐसे नवाचार केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जहां युवा उद्यमी AI-आधारित समाधान तैयार कर रहे हैं—चाहे वह कृषि में ड्रोन का उपयोग हो, स्वास्थ्य सेवाओं में रोबोटिक सपोर्ट, या स्मार्ट सुरक्षा निगरानी तंत्र। इससे न सिर्फ तकनीकी नवाचार बढ़े हैं, बल्कि बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।
ड्रोन टेक्नोलॉजी में उत्तर प्रदेश की प्रगति विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सर्विलांस, आपदा प्रबंधन, कृषि छिड़काव और विकास कार्यों की निगरानी—इन सभी क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग राज्य की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रहा है। नोएडा और कानपुर जैसे शहरों में रोबोटिक्स तथा ड्रोन निर्माण इकाइयों की स्थापना से प्रदेश का औद्योगिक आधार और भी मजबूत हुआ है।
बढ़ते निवेश और तकनीकी साझेदारियों ने उत्तर प्रदेश को एक ऐसे टेक-इकोसिस्टम में बदलना शुरू कर दिया है, जो आने वाले वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे तकनीकी शहरों को कड़ी टक्कर देने में सक्षम होगा।
हालाँकि, इस विकास को स्थायी और सर्वसमावेशी बनाने के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर अधिक बल देने की आवश्यकता है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स आधारित शिक्षा का विस्तार समय की मांग है। साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन के मजबूत ढांचे के बिना ये उपलब्धियाँ खतरे में भी पड़ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश का यह नया तकनीकी अवतार उसकी भविष्य-दृष्टि, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नवाचार-प्रधान नीतियों का प्रमाण है। यदि यही गति बरकरार रहती है, तो निकट भविष्य में उत्तर प्रदेश न केवल भारत का, बल्कि दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा तकनीकी हब बनने की क्षमता रखता है। यह परिवर्तन केवल अर्थव्यवस्था को ही नहीं, बल्कि समाज को भी नई दिशा देने वाला साबित होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here