– बदलती वैश्विक जनसंख्या के बीच भारत के युवाओं की बढ़ती अहमियत
– इटली और जर्मनी में बेहद जरुरत
– इटली तो नागरिकता और कीमत देने को भी तैयारी
शरद कटियार
दुनिया के कई विकसित देश आज एक गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं—युवाओं की कमी। यूरोप, जापान और कई पश्चिमी देशों में जन्मदर लगातार घट रही है और बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसके विपरीत भारत के पास एक विशाल युवा आबादी है, जिसे विशेषज्ञ भारत की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। यही कारण है कि भारत को आज दुनिया का “युवा देश” कहा जाता है।
संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार भारत की आबादी लगभग 143 करोड़ है और इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। भारत में लगभग 65 प्रतिशत आबादी कामकाजी उम्र (15–64 वर्ष) की है, जो किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही स्थिति भारत को डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी जनसंख्या लाभ प्रदान करती है।
भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की संख्या लगभग 37 करोड़ के आसपास है। यह संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। भारत की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जबकि जर्मनी और इटली जैसे देशों में औसत आयु 45 से 48 वर्ष के बीच है।
इसका अर्थ यह है कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आने वाले वर्षों में काम करने, नवाचार करने और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
विकसित देशों में युवाओं की कमी
यूरोप के कई देशों में युवाओं की संख्या तेजी से घट रही है। उदाहरण के लिए इटली और जर्मनी में जन्मदर लगातार गिर रही है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।
इटली में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या ऐतिहासिक रूप से सबसे कम स्तर पर पहुंच गई है। वहीं जर्मनी को आने वाले वर्षों में लाखों नए कामगारों की आवश्यकता होगी, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में लोग सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
इस स्थिति का असर वहां की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
दुनिया के कई देशों में विशेष कर जर्मनी, इटली, फ्रॉन्स में तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स, आईटी प्रोफेशनल और कुशल श्रमिकों की भारी मांग है। भारत के युवा इन क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और कौशल के कारण तेजी से पहचान बना रहे हैं।
भारतीय युवाओं की खासियत यह है कि वे तकनीकी रूप से सक्षम, मेहनती और तेजी से सीखने वाले होते हैं। यही कारण है कि अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय पेशेवरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हालांकि भारत के पास विशाल युवा शक्ति है, लेकिन इस शक्ति का सही उपयोग तभी संभव है जब युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और आधुनिक कौशल प्रदान किए जाएं।
सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं जैसे स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और स्टार्टअप इंडिया युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
यदि भारत अपनी युवा आबादी को सही दिशा दे सके तो यह देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। युवा न केवल नए उद्योग और स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, कृषि और सेवा क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने अपनी युवा शक्ति का सही उपयोग किया, तो आने वाले दशकों में भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो सकता है।
दुनिया के कई देशों में खास कर इटली और जर्मनी जहां युवाओं की संख्या घट रही है, वहीं भारत के पास विशाल युवा शक्ति मौजूद है। यह स्थिति भारत के लिए एक बड़ा अवसर है।
जरूरत इस बात की है कि युवाओं को सही शिक्षा, कौशल और अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकें, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
भारत की युवा शक्ति ही भविष्य में देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है।
भारत की युवा शक्ति की दुनिया भर को पड़ रही जरूरत


