
आंकड़ों से आगे बढ़कर परिणाम देने की चुनौती
उत्तर प्रदेश सरकार ने 9.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। 44,747 करोड़ रुपये के निर्यात, 50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू, 10 लाख संभावित रोजगार, 6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और बेरोजगारी दर 2.24 प्रतिशत तक सिमटने जैसे दावे निश्चित रूप से प्रभावशाली लगते हैं। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये पहुंचने और 2025-26 में 1.20 लाख रुपये तक जाने का अनुमान भी आर्थिक प्रगति का संकेत देता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये आंकड़े आम नागरिक के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहे हैं?
बड़ा बजट, बड़ी जिम्मेदारी
इतना विशाल बजट केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं, बल्कि परिणाम देने के लिए होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में विकास की चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं। यदि 50 लाख करोड़ के एमओयू हुए हैं, तो जनता जानना चाहती है कि उनमें से कितने प्रोजेक्ट जमीन पर उतरे? कितने उद्योग शुरू हुए? कितने युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिला?
सिर्फ “संभावित” 10 लाख रोजगार और वास्तविक नियुक्तियों के बीच बड़ा अंतर होता है। निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश में फर्क को पारदर्शिता के साथ सामने रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
गरीबी और बेरोजगारी के आंकड़े
6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा ऐतिहासिक है। लेकिन गरीबी से बाहर निकलने की परिभाषा क्या है? क्या आय में मामूली वृद्धि ही पर्याप्त है, या जीवन की गुणवत्ता—स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार की स्थिरता—भी बेहतर हुई है?
इसी तरह 2.24 प्रतिशत बेरोजगारी दर का आंकड़ा सकारात्मक है, परंतु यह भी देखना जरूरी है कि रोजगार की प्रकृति क्या है—क्या यह स्वरोजगार है, अस्थायी काम है या नियमित नौकरी?
कृषि उत्पादन में नंबर वन बनने का दावा प्रदेश की ताकत को दर्शाता है। लेकिन किसानों की आय, लागत और लाभ का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि उत्पादन बढ़ा है, तो क्या किसानों की आमदनी भी उसी अनुपात में बढ़ी?
2815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह भविष्य की जरूरत है। लेकिन बिजली की दरें, आपूर्ति की स्थिरता और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच भी उतनी ही अहम है।
विधानसभा परिसर में सपा विधायकों का प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। विपक्ष का काम सवाल उठाना है, और सरकार का काम उन सवालों का जवाब देना। यदि बजट मजबूत है तो बहस में और स्पष्टता आएगी।
यह बजट आकार में बड़ा है, दावों में प्रभावशाली है और दृष्टि में महत्वाकांक्षी है। लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।
आंकड़े विश्वास पैदा कर सकते हैं, पर भरोसा तभी बनेगा जब आम नागरिक को अपने जीवन में बदलाव दिखे—रोजगार में स्थिरता, किसानों को लाभ, युवाओं को अवसर और शहर-गांव दोनों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।
सरकार ने दिशा तय कर दी है। अब देखना यह है कि यह दिशा गति और परिणाम दोनों में कितनी सफल होती है।






