ऑपरेशन रक्षक में 13 फरवरी 1999 को डोडा सेक्टर में लिखी गई वफादारी और वीरता की अमर कहानी
फर्रुखाबाद/मैनपुरी: भारतीय सेना के इतिहास में 13 फरवरी का दिन अदम्य साहस, अटूट वफादारी और सर्वोच्च बलिदान (ultimate sacrifice) का प्रतीक बनकर दर्ज है। वर्ष 1999 में जम्मू-कश्मीर के डोडा सेक्टर में चल रहे ‘ऑपरेशन रक्षक’ के दौरान आर.वी.सी. (रिमाउंट वेटरनरी कॉप्स ) की 14 आर्मी डॉग यूनिट के जांबाज सैनिक शहीद मलेटरी सिंह (Martyr Military Singh) (सेना मेडल, मरणोपरांत) और उनके साहसी ट्रैकर डॉग ‘लीला’ (34A6) ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए एक साथ वीरगति प्राप्त की थी।
यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इंसान और उसके प्रशिक्षित साथी के बीच उस अटूट विश्वास की मिसाल थी, जो रणभूमि में भी डगमगाता नहीं।
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13 फरवरी 1999 को खुफिया सूचना मिली कि डोडा सेक्टर में आतंकवादी सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही मलेटरी सिंह अपने ट्रैकर डॉग ‘लीला’ के साथ सर्च ऑपरेशन पर निकले। ‘लीला’ ने अपनी सूंघने की असाधारण क्षमता से आतंकियों की मौजूदगी का संकेत दिया और आगे का रास्ता दिखाया। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
भीषण फायरिंग में मलेटरी सिंह और ‘लीला’ दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन खून से लथपथ होने के बावजूद मलेटरी सिंह ने पीछे हटने के बजाय मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने न केवल दुश्मन का डटकर सामना किया, बल्कि अपने अन्य साथियों को सुरक्षित निकलने का अवसर भी दिया। अंततः, देश की रक्षा करते हुए यह वीर जोड़ी मातृभूमि की गोद में सदा के लिए सो गई — परंतु अपनी अमर गाथा छोड़ गई।
वफादारी की अनोखी मिसाल: ‘लीला’ का योगदान
भारतीय सेना की डॉग यूनिट्स आतंकवाद-रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ट्रैकर डॉग ‘लीला’ ने उस दिन अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों की पहचान कर सेना को मार्ग दिखाया। ‘लीला’ का बलिदान यह सिद्ध करता है कि सेना के ये प्रशिक्षित साथी केवल जानवर नहीं, बल्कि रणभूमि के सच्चे योद्धा होते हैं। उनकी वफादारी और साहस सैनिकों के बराबर ही सम्मान के पात्र हैं। मलेटरी सिंह को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया।
अमर जवान ज्योति, नई दिल्ली:
उनका नाम इंडिया गेट पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके त्याग की याद दिलाता है।
आर.वी.सी. सेंटर, मेरठ एवं 14 ADU (J&K):
मेरठ कैंट स्थित आर.वी.सी. सेंटर में उनकी तस्वीर ससम्मान प्रदर्शित है। 14 आर्मी डॉग यूनिट के परिसर में उनकी प्रतिमा के साथ वीर ‘लीला’ की मूर्ति सैनिकों को प्रेरणा देती है।
जिलाधिकारी कार्यालय, मैनपुरी:
गृह जनपद मैनपुरी के शहीद स्तंभ पर उनका नाम गौरव के साथ अंकित है।
मिट्टी से जुड़ा नायक
मूल रूप से जनपद मैनपुरी (किशनी/महेगमा) के निवासी शहीद मलेटरी सिंह का परिवार वर्तमान में फर्रुखाबाद के सेंट्रल जेल चौराहा पुलिस चौकी के पीछे निवास करता है।
उनकी धर्मपत्नी वीर नारी श्रीमती गीता देवी आज भी गर्व और श्रद्धा के साथ उनके बलिदान को स्मरण करती हैं। परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है, लेकिन राष्ट्र के लिए यह गर्व का विषय है कि ऐसी वीर संतानों ने इस धरती पर जन्म लिया।
आज भी प्रेरणा, कल भी प्रेरणा
शहीद मलेटरी सिंह और वीर ‘लीला’ की गाथा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उनकी कहानी सिखाती है कि कर्तव्य सर्वोपरि है, और वफादारी तथा साहस का कोई विकल्प नहीं।
“वर्दी की शान, वतन का मान;
अमर रहे वीर मलेटरी सिंह और जांबाज डॉग ‘लीला’ का बलिदान


