फर्रुखाबाद: आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्री रामनगरिया (Mela Ramanagaria) में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर (character building camp) में सन्त सम्मेलन का आयोजन किया गया। अपने संबोधन में वेदों के प्रकाण्ड विद्वान आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि वेद में दो शक्तियों का वर्णन है ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति। किसी भी राष्ट्र की उन्नति के लिए ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति की महती आवश्यकता होती है।
राजस्थान से आए स्वामी आर्य प्रतिनिधि सभा फर्रुखाबाद के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आज प्रातःकाल यज्ञ किया गया। यज्ञोपरान्त वैदिक क्षेत्र में विशाल सन्त सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें वेदों के प्रकाण्ड विद्वान आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि वेद में दो शक्तियों का वर्णन है ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति। किसी भी राष्ट्र की उन्नति के लिए ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति की महती आवश्यता होती है।
राजस्थान से आए स्वामी सोमवारपुरी महाराज ने कहा कि गावो विश्वस्य मातरः” गाय विश्व की माता है। मानव-जाति के लिए गौ से बढ़कर उपकार करने वाली और कोई वस्तु नहीं है। गौ मानव जाति की माता के समान उपकार करने वाली, दीर्घायु और निरोगता देने वाली है। यह अनेक प्रकार से प्राणिमात्र की सेवा कर उन्हें सुख पहुँचाती है। इसलिए हमें गौ माता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
स्वामी महेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि परमानंद की प्राप्ति केवल ईश्वर की भक्ति से ही सम्भव है। साधक साधना के द्वारा ईश्वर रूपी साध्य को प्राप्त करता है। ईश्वर और मृत्यु को हर क्षण याद रखने वाला मनुष्य पापों से बचकर अमरत्व को प्राप्त करता है। साध्वी रेशमा दासी ने कहा कि नारी जाति पर महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के अनेकों उपकार हैं। ऋषि दयानन्द नहीं होते तो नारी जाति को वेद पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त नहीं होता। इसलिए महर्षि दयानन्द सरस्वती जी को हम शत-शत नमन करते हैं।
संत सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में संत महात्मा उपस्थित रहे। अन्त में वैदिक क्षेत्र की ओर से सभी सन्त महात्माओं का शॉल और दक्षिणा देकर सम्मान किया गया। सभा का संचालन आचार्य हरिओम शास्त्री जी ने किया। सभा में उत्कर्ष आर्य,अरविंद गिरी,रामानंद महाराज,लखनपुरी महाराज,महंत जमुनादास त्यागी, स्वामी देवनानंद, गेंदा गिरि,हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य आदि उपस्थित रहे।।सोमवारपुरी महाराज जी ने कहा कि गावो विश्वस्य मातरः” गाय विश्व की माता है। मानव-जाति के लिए गौ से बढ़कर उपकार करने वाली और कोई वस्तु नहीं है।
गौ मानव जाति की माता के समान उपकार करने वाली, दीर्घायु और निरोगता देने वाली है। यह अनेक प्रकार से प्राणिमात्र की सेवा कर उन्हें सुख पहुँचाती है। इसलिए हमें गौ माता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। स्वामी जी ने बताया कि वेद ईश्वरीय वाणी है। वेद से जो जुड़ जाता है वो वेदना से बच जाता है। सन्त उसे कहते हैं जो स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों को सुख प्रदान करता है।सन्तों का जीवन परोपकार के लिए होता है, इसीलिए सन्त समाज पूजनीय होता है। स्वामी महेन्द्रानंद जी महाराज ने कहा कि परमानंद की प्राप्ति केवल ईश्वर की भक्ति से ही सम्भव है। साधक साधना के द्वारा ईश्वर रूपी साध्य को प्राप्त करता है। ईश्वर और मृत्यु को हर क्षण याद रखने वाला मनुष्य पापों से बचकर अमरत्व को प्राप्त करता है।
साध्वी रेशमा दासी जी ने कहा कि नारी जाति पर महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के अनेकों उपकार हैं। ऋषि दयानन्द नहीं होते तो नारी जाति को वेद पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त नहीं होता। इसलिए महर्षि दयानन्द सरस्वती जी को हम शत-शत नमन करते हैं। संत सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में संत महात्मा उपस्थित रहे। अन्त में वैदिक क्षेत्र की ओर से सभी सन्त महात्माओं का शॉल और दक्षिणा देकर सम्मान किया गया। सभा का संचालन आचार्य हरिओम शास्त्री जी ने किया। सभा में उत्कर्ष आर्य,अरविंद गिरी,रामानंद महाराज,लखनपुरी महाराज,महंत जमुनादास त्यागी, स्वामी देवनानंद, गेंदा गिरि,हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य आदि उपस्थित रहे।।


