इटाबा
सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों ने अत्यधिक कार्यभार और संसाधनों की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों ने इस संबंध में National Medical Commission (एनएमसी) को शिकायत भेजते हुए बताया कि मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के मुकाबले डॉक्टरों और सहायक स्टाफ की संख्या में कोई समुचित वृद्धि नहीं हो पाई है, जिससे उन्हें भारी दबाव में काम करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, देशभर के 261 मेडिकल कॉलेजों से एनएमसी को कुल 404 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की शिकायत भी शामिल है। सूची में यह संस्थान 35वें स्थान पर दर्ज किया गया है। शिकायत में विशेष रूप से पीडियाट्रिक्स विभाग का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यहां कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है, जिसके चलते जूनियर डॉक्टरों को लंबी ड्यूटी करनी पड़ रही है और वे मानसिक व शारीरिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण उनके कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ सकता है। उन्होंने कार्यस्थल पर बेहतर वातावरण, पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों की मांग की है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
देशभर से आई शिकायतों में केवल कार्यभार ही नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक शोषण, शैक्षणिक संसाधनों की कमी और कुछ स्थानों पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश शिकायतों के मामले में देश में चौथे स्थान पर है, जो स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका नकारात्मक प्रभाव न केवल डॉक्टरों पर बल्कि मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर भी पड़ेगा। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यभार स्वाभाविक रूप से बढ़ा है, लेकिन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे


