फर्रुखाबाद। हर साल की तरह इस वर्ष भी क्षेत्र में आलू की खुदाई शुरू होते ही दामों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। खेतों से नई फसल निकलते ही बाजार में भारी दबाव बन गया है, जिससे किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। वे उम्मीद कर रहे थे कि इस बार मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा, लेकिन हालात उलटे होते नजर आ रहे हैं।
नई फसल आने के बाद आलू की कीमतों में अचानक आई गिरावट ने किसानों की आमदनी पर सीधा प्रहार किया है। पिछले सप्ताह तक आलू 800 से 900 रुपये प्रति कुंतल में बिक रहा था, परंतु अब इसकी कीमत मात्र 300 से 400 रुपये प्रति कुंतल रह गई है। इतनी बड़ी गिरावट से किसान आर्थिक संकट में घिरते जा रहे हैं।
स्थिति और भी खराब तब हो गई जब कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू ने नए आलू की कीमतों को और नीचे धकेल दिया। भंडारण वाले आलू की अत्यधिक मात्रा और उसकी कमजोर मांग के कारण बाजार में भरमार हो गई है। इससे नए आलू की बिक्री न केवल रुक गई है, बल्कि किसानों की लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने आलू की अच्छी पैदावार और बेहतर दामों की उम्मीद में कई सपने संजोए थे, जैसे बच्चों की शादी-ब्याह, मकान निर्माण और अन्य जरूरी खर्चे। लेकिन बाजार की इस खराब स्थिति ने उनके सारे सपने धूमिल कर दिए हैं। कई किसानों को मजबूरन अपनी योजनाएँ रोकनी पड़ रही हैं।
गांवों और कस्बों में किसान आपस में चर्चा कर रहे हैं कि आखिर इस बार बाज़ार इतना कमजोर क्यों पड़ गया है। वे सरकार से मदद की उम्मीद भी कर रहे हैं, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके। लगातार हो रही मंदी ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से परेशान कर दिया है।
इसी बीच सातनपुर मंडी में आज आलू की आमद 23,000 पैकेट रही। बाजार में कीमतें 301 रुपये से 451 रुपये प्रति पैकेट के बीच दर्ज की गईं। इतनी अधिक आमद और कम दाम किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है।





