– सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं पर उठे बड़े सवाल
मेरठ। एक विश्वविद्यालय में छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के अगले ही दिन छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं परिसर में एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित छात्रों ने कैंपस में तोड़फोड़ भी की। सुरक्षा कार्यालय को निशाना बनाते हुए वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचाया गया और परिसर में लगे गमलों को तोड़ दिया गया। छात्रों का कहना था कि अगर समय रहते उचित मेडिकल सहायता मिलती, तो छात्रा की जान बचाई जा सकती थी।
छात्रों ने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कैंपस में 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा नहीं है और न ही कोई स्थायी डॉक्टर मौजूद रहता है। आपातकालीन स्थिति में छात्रों को बाहरी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कीमती समय बर्बाद हो जाता है। इस लापरवाही को छात्रा की मौत का एक बड़ा कारण बताया जा रहा है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग रखी कि विश्वविद्यालय में तुरंत 24×7 एंबुलेंस सेवा शुरू की जाए और स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति की जाए। साथ ही छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने, हॉस्टलों में निगरानी बढ़ाने और आपातकालीन हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने की भी मांग की गई। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने की कोशिश की। शुरुआती समय में छात्रों का गुस्सा काफी ज्यादा था, लेकिन पुलिस और विश्वविद्यालय अधिकारियों के समझाने के बाद धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आ गई। फिलहाल कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस की तैनाती जारी है।
बताया जा रहा है कि छात्रा का शव एक दिन पहले हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला था। पुलिस ने कमरे को सील कर जांच शुरू कर दी है और मौत के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद छात्रा का अंतिम संस्कार सूरजकुंड पर किया गया। इस घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है।


