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Monday, February 23, 2026

25 हजार के चालान से भड़के रोडवेज कर्मी, बस स्टैंड पर तीन घंटे चक्का जाम; यात्री रहे हलकान

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कासगंज: रोडवेज बस स्टैंड पर यातायात पुलिस द्वारा 25 हजार रुपये का चालान किए जाने के विरोध में परिवहन निगम के चालक और परिचालकों ने हड़ताल कर चक्का जाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा, जिससे दिल्ली, आगरा, बरेली, बदायूं और एटा समेत अन्य जिलों को जाने वाले सैकड़ों यात्री परेशान होते रहे। बस स्टैंड परिसर में अफरा-तफरी और भारी भीड़ का माहौल बना रहा।

चालक सचिन कुमार ने बताया कि वह निर्धारित समय पर बस अड्डे से यात्रियों को लेकर रवाना हो रहे थे। इसी दौरान एक दिव्यांग यात्री बस के गेट पर लटककर उतरने का प्रयास कर रहा था। यात्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड के सामने सड़क पर कुछ क्षण के लिए बस रोकी गई ताकि उसे सुरक्षित उतारा जा सके। आरोप है कि तभी यातायात प्रभारी लक्ष्मण सिंह मौके पर पहुंच गए और बस को जबरन वापस बस स्टैंड ले जाकर यात्रियों को नीचे उतरवा दिया। इसके बाद 25 हजार रुपये का चालान कर दिया गया।

घटना की जानकारी मिलते ही अन्य चालक और परिचालकों में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते सभी बसों का संचालन रोक दिया गया और रोडवेज बस स्टैंड पर चक्का जाम कर हड़ताल शुरू कर दी गई। बसें प्लेटफॉर्म पर खड़ी रहीं और यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश में भटकते नजर आए।

संविदा चालकों का कहना है कि उन्हें हर महीने मात्र 12 हजार रुपये वेतन मिलता है। इसके बावजूद यातायात पुलिस द्वारा अक्सर 20 से 25 हजार रुपये तक के भारी-भरकम चालान कर दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि चालान की राशि उन्हें अपने वेतन से ही चुकानी पड़ती है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा जाता है। चालकों और परिचालकों ने यातायात पुलिस पर मनमानी और उत्पीड़न के भी आरोप लगाए हैं।

हड़ताल के दौरान यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। यात्री राजकुमार ने बताया कि वह डेढ़ घंटे से बदायूं जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई बस उपलब्ध नहीं है। वहीं विनोद नामक यात्री ने कहा कि वह करीब ढाई घंटे से दिल्ली जाने के लिए खड़े हैं, परंतु एक भी बस रवाना नहीं हो सकी। कई परिवार छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ बस स्टैंड पर इंतजार करते रहे।

करीब तीन घंटे बाद अधिकारियों के हस्तक्षेप और वार्ता के बाद स्थिति सामान्य हो सकी और बसों का संचालन धीरे-धीरे शुरू हुआ। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने परिवहन व्यवस्था और यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों ने मांग की है कि प्रशासन ऐसे मामलों में संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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