बगदाद
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब शिक्षा संस्थान भी हमलों की जद में आने लगे हैं। इराक के सुलैमानिया स्थित एक प्रमुख विश्वविद्यालय पर हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, American University of Iraq, Sulaimani पर मंगलवार सुबह हमला किया गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच तनाव चरम पर है।
हालांकि इस हमले को लेकर अभी तक अमेरिका या इस्राइल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी हुई है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, हाल के दिनों में शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।
ईरान के विज्ञान और स्वास्थ्य मंत्रालयों ने संयुक्त बयान जारी कर इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
बयान में कहा गया कि मार्च 2026 से कई विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों पर हमले किए गए हैं, जिनमें भारी नुकसान हुआ है।
इन हमलों में शैक्षणिक ढांचे को क्षति पहुंचने के साथ-साथ कई शिक्षकों और शोधकर्ताओं की जान भी गई है, जिससे अकादमिक जगत में भय का माहौल है।
ईरान ने दावा किया है कि इन हमलों का उद्देश्य उसके वैज्ञानिक ढांचे और बौद्धिक क्षमता को कमजोर करना है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि यह कार्रवाई सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को नुकसान पहुंचाने की साजिश है।
इस बीच Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और अमेरिका को चेतावनी जारी की है।
आईआरजीसी ने कहा कि यदि ईरानी संस्थानों पर हमलों की निंदा नहीं की गई, तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी संस्थान भी निशाने पर आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक तेल और ऊर्जा ठिकानों पर केंद्रित संघर्ष का दायरा बढ़कर शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों तक पहुंच गया है।
इस बदलाव को संघर्ष के खतरनाक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे नागरिक ढांचे और बौद्धिक संपदा को सीधा नुकसान हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।


