पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। हाल के हमलों, मिसाइल हमलों और कूटनीतिक बयानों के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि रूस के साथ ईरान का सैन्य सहयोग जारी रहेगा और यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान और मॉस्को के बीच वर्षों से रणनीतिक साझेदारी है और दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे का सहयोग करते रहे हैं। अराघची के अनुसार यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों का पता लगाने में मदद कर रहा है, तो उन्होंने इस पर विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हैं और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
ईरानी विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों को आत्मरक्षा का कानूनी अधिकार बताया। उनका कहना है कि ईरान ने यह युद्ध नहीं चुना, बल्कि अमेरिका और इस्राइल की ओर से यह संघर्ष उस पर थोपा गया है। उन्होंने कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई प्रतिक्रिया के रूप में की जा रही है।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, प्रतिष्ठानों और संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे ये ठिकाने पड़ोसी देशों की जमीन पर ही क्यों न हों, अगर उनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हो रहा है तो उन्हें लक्ष्य बनाया जा सकता है।
इस बीच तेहरान में तेल भंडारण सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद बड़े पैमाने पर आग और धुएं के गुबार देखे गए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इन हमलों को युद्ध अपराध करार देते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है और आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ गई है।
इजरायली सेना ने दावा किया है कि दक्षिणी लेबनान में झड़पों के दौरान उसके दो सैनिक मारे गए हैं। पिछले सप्ताह इजरायल द्वारा हवाई हमले तेज किए जाने के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर भड़क उठा है, जिससे सीमा पर तनाव बढ़ गया है।
संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक दिया। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने मिसाइलों और ड्रोन की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया।
बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है। इटली के विदेश मंत्री ने बताया कि अब तक लगभग 20,000 इटालियन नागरिकों को मध्य पूर्व से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
ऑस्ट्रेलिया ने भी सुरक्षा स्थिति को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को यूएई की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।
इस बीच रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो ने हिंसा समाप्त करने और संवाद शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ता यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में भय और अस्थिरता फैला रहा है, इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतते हुए शांति की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।


