फर्रुखाबाद| गणतंत्र दिवस जैसे संविधान के सबसे बड़े पर्व पर संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का विद्यालय परिसर से गायब होना विकासखंड कमालगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय बहोरना में बड़े विवाद का कारण बन गया। 26 जनवरी को विद्यालय प्रांगण में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान जब बाबा साहब की प्रतिमा वहां मौजूद नहीं पाई गई, तो ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया और मौके पर ही इंचार्ज प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार दीक्षित से तीखी बहस शुरू हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय परिसर में आज तक कभी भी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई और हर बार संविधान निर्माता को नजरअंदाज किया जाता रहा है। हालात इतने बिगड़ गए कि गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम बीच में ही रोकना पड़ा। इसके बाद एक ग्रामीण अपने घर से बाबा साहब की प्रतिमा लेकर विद्यालय पहुंचा और उसे विद्यालय प्रांगण में स्थापित किया गया, तब जाकर कहीं कार्यक्रम दोबारा शुरू हो सका।
मामले में इंचार्ज प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार दीक्षित का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि विद्यालय के पास ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पहले से स्थापित है और बच्चों को वहीं ले जाया जाता है। हालांकि इस तर्क पर ग्रामीणों ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब गणतंत्र दिवस का मुख्य आयोजन विद्यालय परिसर में हो रहा था, तो संविधान निर्माता की प्रतिमा वहां क्यों नहीं थी। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो फिर एक ग्रामीण को अपने घर से प्रतिमा लाने की जरूरत क्यों पड़ी।
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में नोटिस जारी कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि इस तरह की चूक किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, विशेषकर तब जब मामला संविधान और उसके निर्माता के सम्मान से जुड़ा हो।
यह घटना अब केवल एक विद्यालय या एक गांव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में संवैधानिक मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन आगे इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि गणतंत्र दिवस सिर्फ झंडा फहराने का दिन नहीं, बल्कि संविधान और उसके निर्माता को पूरे सम्मान के साथ याद करने का दिन है।

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