रांची: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के लिए वर्ष 2025 परिवर्तन और सख्त फैसलों का वर्ष साबित हुआ। इस ऐतिहासिक बदलाव के केंद्र में रहे प्रो. राजकुमार, (Prof. Rajkumar) जिनके नेतृत्व और प्रशासनिक दृढ़ता ने दशकों पुरानी समस्या का समाधान संभव किया।
प्रो. राजकुमार का सशक्त नेतृत्व
निदेशक पद संभालने के बाद प्रो. राजकुमार ने रिम्स की ज़मीन पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को गंभीरता से उठाया। उन्होंने न केवल इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूती से रखा, बल्कि संस्थान के भविष्य की ज़रूरतों—विशेषकर सुपरस्पेशियलिटी और इनडोर सुविधाओं—को प्राथमिकता में शामिल किया।
रिम्स के तीनों परिसरों में फैले अवैध निर्माणों के विरुद्ध माननीय हाईकोर्ट द्वारा सख्त टिप्पणी और हस्तक्षेप तक मामला पहुंचाने में निदेशक की भूमिका निर्णायक रही। आवश्यक दस्तावेज, रिपोर्ट और तथ्यों को मजबूती से प्रस्तुत कर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अतिक्रमण के कारण संस्थान का विकास वर्षों से बाधित रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सभी अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त कराया गया। न्यू कैंपस की लगभग 25 एकड़ भूमि में से करीब 10 एकड़ ज़मीन अब पूरी तरह मुक्त हो चुकी है, जिसका निरीक्षण भविष्य की स्वास्थ्य परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है। प्रो. राजकुमार का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा कि RIMS केवल एक रेफरल संस्थान न रहे, बल्कि झारखंड को उच्च स्तरीय सुपरस्पेशियलिटी उपचार यहीं उपलब्ध हो। अतिक्रमण हटने से अब यह सपना ज़मीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।
रिम्स में हुई यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि यदि नेतृत्व मजबूत हो, तो वर्षों पुरानी अव्यवस्था भी खत्म की जा सकती है। प्रो. राजकुमार का यह कदम न केवल RIMS बल्कि पूरे राज्य के चिकित्सा संस्थानों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गया है। वर्ष 2025 को रिम्स के इतिहास में उस मोड़ के रूप में याद किया जाएगा, जब निदेशक प्रो. राजकुमार के नेतृत्व में अतिक्रमण मुक्त होकर संस्थान ने विकास और मरीजों के बेहतर इलाज की दिशा में नया अध्याय शुरू किया।


