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Friday, April 10, 2026

आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, दूसरी बार भी नहीं किया बदलाव

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– महंगाई नियंत्रण और आर्थिक संतुलन पर फोकस
नई दिल्ली। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2027 की मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए एक बार फिर नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा है। इससे पहले दिसंबर में आरबीआई ने 0.25 फीसदी की कटौती कर बाजार और आम लोगों को कुछ राहत दी थी, लेकिन इस बार केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाते हुए दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया।
आरबीआई के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण महंगाई दर को नियंत्रित रखना और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना बताया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अस्थिर आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू महंगाई के दबाव को देखते हुए आरबीआई फिलहाल किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि महंगाई निर्धारित लक्ष्य के भीतर रहे और अर्थव्यवस्था भी स्थिर गति से आगे बढ़ती रहे।
रेपो रेट स्थिर रहने का सीधा असर आम लोगों पर यह होगा कि होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। यानी जिन लोगों ने पहले से लोन ले रखा है, उनकी ईएमआई में न तो बढ़ोतरी होगी और न ही कोई नई राहत मिलेगी। वहीं नए कर्ज लेने वालों को भी मौजूदा दरों पर ही लोन मिलेगा। बैंकिंग सेक्टर में भी यह फैसला स्थिरता का संकेत देता है, जिससे बैंकों को अपनी ब्याज दरों में बार-बार बदलाव नहीं करना पड़ेगा।
शेयर बाजार और निवेशकों के नजरिए से यह फैसला संतुलित माना जा रहा है। हालांकि कुछ निवेशक दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन आरबीआई का यह कदम दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। इससे बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव की संभावना कम होगी और निवेशकों का भरोसा बना रहेगा।
कुल मिलाकर, आरबीआई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने के बजाय आर्थिक आंकड़ों और परिस्थितियों का गहराई से आकलन कर आगे की रणनीति तय करेगा। आने वाले महीनों में महंगाई दर, वैश्विक बाजार की स्थिति और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के आधार पर ही भविष्य की मौद्रिक नीति निर्धारित की जाएगी। फिलहाल, यह फैसला स्थिरता और सतर्कता का संकेत माना जा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था को संतुलित गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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