कायमगंज , फर्रुखाबाद । राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम द्वारा आयोजित संगोष्ठी में अध्यक्ष प्रोफेसर रामबाबू मिश्रा रत्नेश ने कहा कि विश्व स्तर पर हिंसा और उन्माद के इस माहौल में दानवाधिकार मानवाधिकारों पर भारी पड़ रहे हैं। मानवाधिकारों की पैरोकारी करने वाली एजेंसियां असहाय सिद्ध हो रही है। स्थानीय स्तर पर पुलिस , पूंजीपति एवं माफिया गिरोहों की तिकड़ी के आगे जैसे आम आदमी मुंह खोलने से डरता है। अधिवक्ता राजवीर सिंह शाक्य ने कहा कि साम्यवाद, धार्मिक राज्य व्यवस्था, तानाशाही शासन मानवाधिकार के सबसे बड़े शत्रु हैं। जनतंत्र ही है जिसमें नागरिक अपने अधिकारों की कम से कम चर्चा तो कर लेते हैं। प्रवक्ता ईश्वर दयाल दीक्षित ने कहा कि अधिकार के उपभोग के लिए समानांतर कर्तव्य अनिवार्य शर्त है। अहिवरन सिंह गौर, शिवाकांत शुक्ला, जेपी दुबे, शिवकुमार दुबे, गीतकार पवन बाथम ने कहा कि जागृत एवं जीवंत राष्ट्र ही मानवाधिकारों के सबसे बड़े संरक्षक हैं। कई वीएस तिवारी ने कहा—
युद्ध और उन्माद से पीड़ित है संसार कौन सुरक्षित करेगा मानव के अधिकार।
छात्र कवि यशवर्धन ने कहा कानूनी प्रतिबंध है जीवन के संतापकिस मानव अधिकार की बात कर रहे आप। गोष्ठी का संचालन शिक्षक अनुपम मिश्रा ने किया।




