अयोध्या। बृहस्पतिवार का दिन रामनगरी के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के द्वितीय तल पर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम यंत्र की स्थापना की। इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालु, संत-महात्मा और राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लगभग 2000 आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे, जिससे पूरा परिसर भक्ति और उल्लास के माहौल में सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष, आस्था और प्रतीक्षा का पूर्णत्व है। उन्होंने कहा कि अब प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूरी तरह से परिपूर्ण हो गया है और यह समस्त सनातन संस्कृति के लिए गौरव का विषय है। इस दौरान वर्ष 1984 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अनेक कार्यकर्ता और श्रद्धालु भी कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित किए गए थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक आचार्यों के निर्देशन में श्रीराम यंत्र का विधिवत पूजन-अर्चन किया और भगवान श्रीरामलला की आरती उतारकर देशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ सहित तीन प्रमुख आचार्य उपस्थित रहे और उन्होंने वैदिक रीति से पूरे अनुष्ठान को सम्पन्न कराया।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने जानकारी दी कि इस भव्य आयोजन में केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमई अम्मा भी अपने लगभग एक हजार भक्तों के साथ शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि श्रीराम मंदिर के निर्माण में लगभग 6000 लोगों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया है, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। पूरे जिले को 13 जोन और 37 सेक्टर में विभाजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सुरक्षा व्यवस्था में लगभग तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात रहे, जिनमें 18 एसपी/एएसपी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक, 400 उप निरीक्षक, 50 महिला उपनिरीक्षक, 1800 आरक्षी एवं महिला आरक्षी, 90 यातायात पुलिसकर्मी और 550 मुख्य आरक्षी शामिल थे। इसके अलावा प्रमुख मार्गों, मंदिर परिसर, हेलीपैड, रूफटॉप और संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखी गई।
अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित राम दरबार के दर्शन किए और श्रीरामलला के समक्ष आरती उतारकर देश की उन्नति और नागरिकों के कल्याण की प्रार्थना की। श्रीराम यंत्र की स्थापना के बाद उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी आमंत्रित अतिथि और श्रद्धालु भगवान रामलला के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे और इसके पश्चात अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और एकता का भी एक भव्य प्रतीक बनकर सामने आया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम यंत्र की स्थापना सम्पन्न, राष्ट्रपति ने रामलला के किए दर्शन


