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Friday, February 20, 2026

रामसर साइट पटना पक्षी विहार बना प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग

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सर्दियों में हजारों प्रवासी परिंदों से गुलजार

एटा। जलेसर क्षेत्र में स्थित पटना पक्षी विहार इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और पक्षी शोधार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सुबह की हल्की धूप में खजूर के ऊंचे वृक्षों के बीच से छनकर आती सुनहरी किरणें और झील के ऊपर एक साथ उड़ान भरते हजारों परिंदों का दृश्य यहां आने वाले हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह दृश्य किसी कलाकार की कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत में प्रकृति का अनुपम उपहार है।

जलेसर कस्बे से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित यह पक्षी विहार देश-विदेश के हजारों पक्षियों का मौसमी आशियाना बन चुका है। यहां पहुंचते ही पक्षियों का मधुर कलरव, झील की लहरों की सरसराहट और हरियाली से भरा विस्तृत क्षेत्र मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है। सर्दियों के मौसम में यहां प्रवासी पक्षियों की विशेष चहल-पहल रहती है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी हजारों पक्षी यहां लगभग चार माह तक प्रवास करते हैं, जबकि कुछ प्रजातियां वर्षभर यहीं डेरा डाले रहती हैं।

वर्ष 1991 में स्थापित यह अभयारण्य 108.86 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और देश की चुनिंदा आर्द्र भूमियों में शामिल है। इसे रामसर साइट का दर्जा मिल चुका है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और सुदृढ़ हुई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था BirdLife International ने भी इसे महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र घोषित किया है, जो इसकी वैश्विक महत्ता को दर्शाता है।

जनवरी माह में हुई एशियन वाटर बर्ड सेंसस-2026 के तहत यहां 56 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए, जिनमें 27 प्रवासी और 29 स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से नौ प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणी में पाई गईं। यह स्थल सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, इसलिए यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या अधिक रहती है। अक्टूबर के अंत से ही पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। राजहंस, बार-हेडेड गूज, नीलसर, पिनटेल, किंगफिशर, सोवलर, डबचिक, स्नेक बर्ड, कॉमन टील, ब्रह्मनी डक और कूट जैसे आकर्षक पक्षी यहां की शोभा बढ़ाते हैं।

इस पक्षी विहार की खास बात यह है कि झील में वर्षभर पानी नहीं रहता। गर्मियों में झील सूख जाती है, जबकि वर्षा ऋतु में यह लबालब भर जाती है और अप्रैल तक पानी बना रहता है। हर साल नया पानी आने से झील का प्राकृतिक संतुलन बेहतर बना रहता है, जो जलचर पक्षियों को आकर्षित करता है।

सुबह और सांझ के समय झील का दृश्य सबसे अधिक मनोहारी होता है, जब जलचर पक्षी पानी में तैरते और गोते लगाते नजर आते हैं। वृक्षों पर बने छोटे-छोटे घोंसले और झील में अठखेलियां करते परिंदे प्रकृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि यह स्थल केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार संग पिकनिक मनाने वालों के लिए भी आदर्श पर्यटन स्थल बन गया है।

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