आश्रम में विधि-विधान से दी गई भू-समाधि

फर्रुखाबाद|  पांचाल घाट गंगा तट पर आयोजित माघ मेला श्रीरामनगरिया में शुक्रवार को उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब कल्पवास कर रहे जनपद हरदोई निवासी संत मनमोहन गिरी महाराज का अचानक निधन हो गया। संत के निधन की खबर मिलते ही मेला क्षेत्र, आश्रम और आसपास के इलाकों में मौजूद साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं में गहरा दुख व्याप्त हो गया। देर शाम आश्रम परिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ उन्हें भू-समाधि दी गई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन कर संत को विदाई दी।
जानकारी के अनुसार जनपद हरदोई के थाना पाली क्षेत्र के ग्राम परलिया निवासी संत मनमोहन गिरी महाराज लंबे समय से फर्रुखाबाद के पांचाल घाट (घटियाघाट) स्थित आश्रम में रहकर साधना कर रहे थे। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय आश्रम, सेवा और तपस्या में बिताया था। वर्तमान में वह माघ मेला श्रीरामनगरिया के दौरान गंगा तट की पांचवीं सीढ़ी के पास कल्पवास कर रहे थे। उनके शिष्य रामसागर जी महाराज ने बताया कि संत काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनकी तबीयत लगातार खराब बनी हुई थी।
शुक्रवार को अचानक संत मनमोहन गिरी महाराज की सांस फूलने लगी और हालत तेजी से बिगड़ गई। स्थिति गंभीर देखते हुए शिष्य उन्हें तत्काल मेला श्रीरामनगरिया में बनाए गए अस्थायी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद संत को मृत घोषित कर दिया। संत के निधन की सूचना मिलते ही उनके शिष्यों और अनुयायियों में शोक की लहर फैल गई।
डॉक्टर द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद संत के शिष्य उनके पार्थिव शरीर को पांचाल घाट स्थित आश्रम लेकर पहुंचे। आश्रम परिसर में भू-समाधि देने के लिए समाधि स्थल पर खुदाई कराई गई और आवश्यक धार्मिक तैयारियां शुरू की गईं। संत मनमोहन गिरी महाराज की आयु लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है। वह अपने सरल स्वभाव, संयमित जीवन और साधना के लिए जाने जाते थे, जिस कारण मेला क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में कल्पवासी और श्रद्धालु उनके संपर्क में रहते थे।
संत के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही मेला क्षेत्र से बड़ी संख्या में साधु-संत, कल्पवासी और स्थानीय लोग आश्रम पहुंचे। विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों से आए संतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे आश्रम परिसर में शोक का माहौल रहा और हर आंख नम दिखाई दी। विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चार के बीच संत मनमोहन गिरी महाराज को भू-समाधि दी गई।
श्रद्धालुओं का कहना था कि संत मनमोहन गिरी महाराज का जीवन सादगी, तप और सेवा का प्रतीक था। उनके निधन से क्षेत्र के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। आश्रम और मेला क्षेत्र में देर शाम तक शोकसभा का माहौल बना रहा, जहां लोगों ने संत के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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