– सांसद रमेश अवस्थी का भावुक वक्तव्य, भरोसा दिलाया—किसी को निराश नहीं करूंगा
– अपनी लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और जनता का सम्मान करना मेरी प्राथमिकता
लखनऊ। जनप्रतिनिधित्व केवल संवैधानिक दायरे तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह जनता से जुड़े नैतिक दायित्वों का नाम है। यही भाव उस समय स्पष्ट रूप से सामने आया, जब रमेश अवस्थी, सांसद कानपुर ने अपने गृह जनपद फर्रुखाबाद को लेकर बेहद भावुक और आत्मीय वक्तव्य दिया। उन्होंने दो टूक कहा—“मैं कानपुर का सांसद जरूर हूं, लेकिन फर्रुखाबाद भी मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। यहां की जनता को मैं कभी निराश नहीं करूंगा।”
उनके इस कथन ने न केवल लोगों को भावुक किया, बल्कि जनमानस में यह संदेश भी दिया कि राजनीति से ऊपर उठकर वे सेवा को अपना धर्म मानते हैं।
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि जनता का विश्वास किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए सबसे बड़ी पूंजी होता है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मैं अपने क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम कर रहा हूं और यह क्रम आगे भी लगातार चलता रहेगा। जनता की समस्याएं, अपेक्षाएं और सपने मेरे लिए सबसे पहले हैं।” सांसद ने यह भी संकेत दिया कि फर्रुखाबाद से उनका जुड़ाव केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भावनात्मक है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं, युवाओं की जरूरतों, किसानों की परेशानियों और आम नागरिकों की अपेक्षाओं को वे गंभीरता से समझते हैं और उनके समाधान के लिए हर संभव प्रयास स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्राथमिकता से करेंगे ।
सांसद अवस्थी ने यह भरोसा भी दिलाया कि—
विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी
जनसमस्याओं को शासन और प्रशासन के स्तर तक मजबूती से उठाया जाएगा।साथ ही
युवाओं, किसानों और व्यापारियों से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता में रहेंगे,
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि विकास केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर दिखाई दे।
उनका वक्तव्य उस राजनीति की तस्वीर पेश करता है, जहां पद से अधिक महत्व कर्तव्य और संवेदनशीलता का होता है।
उन्होंने यह साफ किया कि जनप्रतिनिधि होने का अर्थ केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में सहभागी बनना है।
सांसद के इन शब्दों से लोगों में एक नया विश्वास दिखाई दिया। लोगों ने महसूस किया कि उनका सांसद केवल वादे नहीं करता, बल्कि जिम्मेदारी को दिल से स्वीकार करता है।
रमेश अवस्थी का यह भावुक और सशक्त वक्तव्य इस बात का प्रमाण है कि सच्चा जनप्रतिनिधि वही होता है, जो संवैधानिक सीमाओं से आगे बढ़कर जनता के प्रति नैतिक जिम्मेदारी निभाए।
कानपुर का सांसद होकर भी फर्रुखाबाद को अपनी जिम्मेदारी बताना—यही उनकी सोच, संवेदना और जनसेवा का असली परिचय है।






