“देश में हजारों क्षत्रिय हिंदू संगठनों को एकजुट रहना होगा, मर्यादा में रहकर डिबेट जरूरी”
फर्रुखाबाद। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा सिंगरामऊ के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू ने प्रेस वार्ता में वोट बैंक राजनीति और जातीय ध्रुवीकरण पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में वर्षों से “वोटों की चोट” सबसे अधिक क्षत्रिय समाज पर की गई है और राजनीतिक साजिशों ने रियासतों के गौरवशाली इतिहास को निशाना बनाकर इस बहादुर कौम को बार-बार बांटने का प्रयास किया है।
“रण और रणनीति तभी सफल जब हो एकता, श्रेष्ठ बनने की होड़ छोड़नी होगी”
राजू ने कहा कि क्षत्रिय समाज में आपसी श्रेष्ठता सिद्ध करने की होड़ और श्रेय लेने की प्रवृत्ति संगठन को कमजोर करती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा “रण और रणनीति तभी सफल होगी, जब हम आपस में श्रेष्ठ बनने की प्रतिस्पर्धा छोड़कर सामूहिक एकता अपनाएँ।”
उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 12 अप्रैल को आगरा में होने वाले ‘राणा सांगा के रण’ कार्यक्रम में हजारों क्षत्रिय कार्यकर्ताओं का पहुँचना तय है। इसके लिए चल रही महासंग्राम यात्रा की शुरुआत डायल-1090 कार्यालय से हुई थी।
प्रेसवार्ता के दौरान राघवेंद्र सिंह राजू ने वाराणसी से प्रकाशित पुस्तक ‘फिर इतिहास लौट आता है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सृष्टि की रचना के साथ ही वर्ण व्यवस्था का ढांचा अस्तित्व में आया ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र
इन चार आयामों में मानव सभ्यता का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि आज सत्ता पाने की राजनीति में “कपड़ों का रंग बदलने वाले” लोग षड्यंत्र रच रहे हैं, और वोटों की चोट सबसे अधिक क्षत्रिय समाज पर की जा रही है। ऐसे समय में समाज को सामूहिक शक्ति के साथ जवाब देना आवश्यक है।
राजू ने कहा कि संगठन की मजबूती के लिए अहम,घमंड, और व्यक्तिगत लाभ जैसी कमजोरियों को त्यागना होगा।
“उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है… जिंदा हो तो जिंदा आना जरूरी है।”
इन पंक्तियों के साथ उन्होंने क्षात्र धर्म और संगठन की मजबूती पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि देशभर में हजारों क्षत्रिय एवं हिंदू संगठन सक्रिय हैं, किन्तु शक्तियाँ बिखरी हुई हैं। यदि ये संगठन एकजुट हों तो सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रभाव अत्यधिक बढ़ सकता है।
राजू ने सभी संगठनों को मर्यादा में रहते हुए डिबेट और संवाद को प्राथमिकता देने की अपील की।




