फर्रुखाबाद| फर्रुखाबाद जनपद की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखने वाले कमालगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख उमर खां और उनके परिवार का राजनीतिक अध्याय अब लगभग समाप्ति की ओर है। वंथल शाहपुर गांव में वर्षों तक प्रधानी पर वर्चस्व रखने वाले उमर खां को इस बार अपने ही गांव में करारी हार का सामना करना पड़ा। यह हार केवल एक चुनावी पराजय नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से पूरी तरह खिसक जाने का संकेत मानी जा रही है।
अपने ही गांव में साख का पतन
जिस गांव से उमर खां की राजनीतिक पहचान बनी, वहीं से उन्हें सबसे बड़ा झटका लगा। स्थानीय मतदाताओं ने खुलकर उनके खिलाफ मतदान किया। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा मतदाताओं तक में यह संदेश साफ दिखा कि अब पुराने तौर-तरीकों और दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उमर खां पर सबसे बड़ा आरोप अवसरवाद का रहा है। समय-समय पर दल बदलने और निजी स्वार्थ के लिए समीकरण साधने की रणनीति ने उनकी विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाई। बीते नगर पालिका चुनाव में समाजवादी पार्टी से जुड़े रहते हुए कथित रूप से पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की चर्चाएं भी रहीं, जिससे उनका राजनीतिक कद और कमजोर हुआ।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि उमर खां और उनके परिवार पर सत्ता का दुरुपयोग, दबाव की राजनीति और प्रशासनिक प्रभाव के सहारे लाभ लेने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। इन्हीं वजहों से जनता के बीच उनकी साख लगातार गिरती चली गई। गांव और आसपास के इलाकों में अब उनका नाम विकास की बजाय विवादों से जोड़ा जाने लगा है।
यह पराजय सिर्फ उमर खां तक सीमित नहीं रही। उनके परिवार और समर्थक नेटवर्क की राजनीतिक पकड़ भी जिले में कमजोर पड़ चुकी है। जिन पदों और प्रभाव के दम पर वे वर्षों तक राजनीति करते रहे, वह आधार अब लगभग समाप्त हो चुका है।
इस घटनाक्रम को फर्रुखाबाद की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। जनता ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार, अवसरवाद और धोखाधड़ी की राजनीति को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वंथल शाहपुर से उठी यह आवाज जिले की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है, जहां जवाबदेही और भरोसा ही नेतृत्व की असली कसौटी होगा।






