लखनऊ। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने 14 दिसंबर को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के बाद से प्रदेश भर में परिचय बैठकों का दौर तेज कर दिया है। इन बैठकों के साथ उनका जिस तरह भव्य स्वागत हो रहा है, वह अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। रास्तों में दर्जनों जगह स्वागत, फूलों की वर्षा और कहीं-कहीं जेसीबी से पुष्पवर्षा जैसे दृश्य सामान्य उत्साह से आगे बढ़कर सियासी संकेतों के रूप में देखे जा रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी पश्चिम क्षेत्र, ब्रज क्षेत्र, अवध क्षेत्र और गोरखपुर क्षेत्र की बैठकों में शामिल हो चुके हैं, जबकि कानपुर क्षेत्र की बैठक प्रस्तावित है। हर क्षेत्र में बैठक से पहले उनका जोरदार स्वागत किया गया। हाल ही में अयोध्या जाते समय लखनऊ से अयोध्या की दूरी तय करने में उन्हें करीब दस घंटे लग गए, क्योंकि रास्ते में 50 से अधिक स्थानों पर स्वागत हुआ और काफिले में एक हजार से ज्यादा गाड़ियां शामिल होती चली गईं। इसी तरह गोरखपुर में एयरपोर्ट से पार्टी कार्यालय तक लगभग 50 जगह स्वागत हुआ, जहां कार्यकर्ताओं ने जेसीबी से फूलों की वर्षा तक कर दी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंकज चौधरी सात बार सांसद और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर यह उनका पहला बड़ा पद है। ऐसे में इन बैठकों और स्वागत कार्यक्रमों के जरिए वह प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। इससे संगठन में उनकी पकड़ मजबूत होगी और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी।
राजनीतिक जानकार इसे ओबीसी राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं। पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग से आते हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को मिले झटके के बाद यह माना जा रहा है कि ओबीसी, खासकर कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनके भव्य स्वागत के जरिए यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि पार्टी के लिए उनके प्रति व्यापक समर्थन मौजूद है, जिससे विपक्ष के पीडीए राजनीति की काट तैयार की जा सके।
इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में करीब एक साल का समय शेष है। ऐसे आयोजनों को चुनावी तैयारी की शुरुआती कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। स्वागत कार्यक्रमों और बैठकों के बहाने जहां संगठन को सक्रिय किया जा रहा है, वहीं टिकट के दावेदार और स्थानीय नेता भी अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से न केवल चुनावी माहौल बनेगा, बल्कि पार्टी नेतृत्व को जमीनी कार्यकर्ताओं की क्षमता और सक्रियता परखने का अवसर भी मिलेगा।





