नई दिल्ली। अयोध्या की बाबरी मस्जिद को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पहला प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर लगाए गए उस विवादित आरोप के बाद, राजनीतिक हलकों में नया तूफ़ान उठ खड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेहरू बाबरी मस्जिद की मरम्मत सरकारी फंड से करवाना चाहते थे। अब कांग्रेस ने इस दावे को पूरी तरह झूठ और मनगढ़ंत बताते हुए बीजेपी पर “इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने” का आरोप लगाया है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि नेहरू धार्मिक कार्यों में सरकारी धन के उपयोग के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने याद दिलाया कि सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण जैसे ऐतिहासिक मामले में भी नेहरू ने सरकारी धन देने से साफ इनकार किया था, जबकि वह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र था। टैगोर का सवाल है कि जब नेहरू ने सोमनाथ जैसे बड़े धार्मिक स्थल के लिए सरकारी राशि नहीं दी, तो बाबरी मस्जिद पर सरकारी फंड खर्च करने की सलाह कैसे दे सकते थे?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह दावा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि “नेहरू सरकारी पैसे से बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण कराना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इसका विरोध किया।” उनके इस बयान ने विपक्ष को नया हथियार दे दिया है।
सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उसके पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने एक पैसा नहीं दिया था, पूरी प्रक्रिया एक ट्रस्ट द्वारा चंदे के सहारे पूरी हुई थी। इसी तरह राम मंदिर निर्माण में भी सरकार ने कोई वित्तीय सहायता नहीं दी—इसे उन्होंने “असली सेक्युलरिज़्म” बताया।
इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता टैगोर ने कहा कि राजनाथ सिंह का बयान सिर्फ अतीत पर बहस नहीं है, बल्कि “देश के संस्थापकों को बदनाम करने की बीजेपी की गहरी साजिश” का हिस्सा है। टैगोर का आरोप है कि बीजेपी जनता के बीच भ्रम फैलाने और राजनीतिक फायदे के लिए “मनगढ़ंत कहानियाँ” गढ़ रही है।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है और आने वाले दिनों में इस बयानबाजी का असर संसद से लेकर सड़क तक दिख सकता है।





