लखनऊ: अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा (All India Brahmin Sabha) के प्रदेश उपाध्यक्ष Rajesh Mishra द्वारा उठाए गए मुद्दों की गूंज अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। ब्राह्मण समाज से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों, सामाजिक सम्मान और उपेक्षा को लेकर दिए गए उनके बयानों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
राजेश मिश्रा ने हाल ही में संगठनात्मक बैठक व सार्वजनिक मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा था कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज की भूमिका केवल चुनावी गणित तक सीमित न रखी जाए, बल्कि नीतिगत निर्णयों में भी उसकी भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने प्रशासनिक नियुक्तियों, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक संतुलन से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया।
सूत्रों के अनुसार, इन बयानों और मांगों की रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी गई, जिसके बाद यह मामला सीधे योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने संबंधित विभागों और राजनीतिक फीडबैक तंत्र से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राजेश मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव की राजनीति नहीं, बल्कि समाज की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता के गलियारों तक पहुंचाना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा प्रदेश भर में संवाद और संगठन के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ब्राह्मण समाज की संगठित आवाज यदि इसी तरह मुखर होती रही, तो इसका असर आने वाले समय में नीति और राजनीति—दोनों पर साफ दिखाई दे सकता है।


