लखनऊ| राजधानी में बिजली चोरी और बिल न जमा करने वालों पर सख्त कार्रवाई के बीच ऊर्जा विभाग ने गांव से लेकर शहर तक कुल 1,13,758 बिजली डिफाल्टर चिन्हित किए हैं, जिन पर लगभग 842 करोड़ रुपये की भारी देनदारी दर्ज है। इनमें 72,748 उपभोक्ता नियमित बिजली जलाने के बावजूद बिल न चुकाने वाले हैं, जबकि 41,010 लोग बिजली चोरी करते पकड़े गए। बढ़ते बकाये और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने “बिजली बिल राहत योजना (एकमुश्त समाधान योजना)” लागू की है, जिसका पहला चरण आज सोमवार से शुरू हो गया है।
योजना के पहले चरण में सभी डिफाल्टरों का 100% ब्याज माफ किया जाएगा और मूल राशि पर 25% की छूट मिलेगी। विभाग ने सभी बकायेदारों के नोटिस तैयार कर दिए हैं और आज से इन्हें डिफाल्टरों के घरों, दुकानों और कार्यालयों तक पहुंचाना शुरू कर दिया गया है। उपभोक्ताओं को मौके पर ही बकाया राशि और मिलने वाले डिस्काउंट की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक योगेश कुमार के अनुसार, योजना का लाभ लेने के लिए शहर से लेकर गांव तक सभी जनसुविधा और बिलिंग केंद्रों पर पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। उपभोक्ता केवल अपना खाता नंबर बताकर यह पता कर सकेंगे कि उन्हें एकमुश्त भुगतान या किस्तों में कितना लाभ मिलेगा।
बिजली चोरी के मामलों में फंसे उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत दी गई है। अमौसी जोन के मुख्य अभियंता महफूज आलम ने बताया कि निगोहां से रहीमाबाद और बंथरा-हरौनी से आलमबाग तक बिजली चोरी में फंसे कुल 29,111 उपभोक्ताओं पर लगभग 414 करोड़ रुपये का बकाया है। पहले चरण में उनका 50% जुर्माना माफ, दूसरे में 45%, और तीसरे चरण में 40% तक छूट मिलेगी। यानी यदि किसी उपभोक्ता पर दो लाख रुपये का जुर्माना है, तो पहले चरण में उसे केवल एक लाख रुपये देकर मामला समाप्त कराया जा सकता है।
योजना तीन चरणों में चलेगी—पहला चरण 1 से 31 दिसंबर, दूसरा 1 से 31 जनवरी और तीसरा 1 से 28 फरवरी तक। पहले दो चरणों में ब्याज पूरी तरह माफ रहेगा और मूल रकम पर 25% छूट मिलेगी, जबकि तीसरे चरण में ब्याज तो माफ रहेगा लेकिन मूल राशि पर 15% छूट मिलेगी।
अमौसी जोन में सबसे अधिक 57,000 बिल डिफाल्टर और 29,111 बिजली चोरी के मामले दर्ज हैं, जिन पर 729 करोड़ रुपये बकाया है। लखनऊ मध्य, जानकीपुरम और गोमतीनगर जोन में क्रमशः 3,994, 9,500 और 2,254 बिल डिफाल्टर चिन्हित हुए हैं, जबकि बिजली चोरी के 4,225, 4,500 और 3,174 मामले सामने आए हैं। कुल मिलाकर चारों जोनों में मिलाकर 842 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है।
जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह के अनुसार, योजना के लागू होते ही आज से विभागीय टीमें डिफाल्टरों के घरों और प्रतिष्ठानों पर लगातार दस्तक दे रही हैं। यह अभियान पंजीकरण पूर्ण होने तक रोजाना चलेगा, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ता इस महत्वपूर्ण राहत योजना का लाभ ले सकें।






