नवाबगंज| सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज (सीएचसी) परिसर में बने रैन बसेरे पर ताला लगे होने से मरीजों के परिजनों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। अस्पताल परिसर में रैन बसेरा बना होने के बावजूद उसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के साथ आए तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों के साथ उनके परिजन भी अस्पताल पहुंचते हैं। मरीज के भर्ती हो जाने के बाद इन परिजनों को रातभर ठहरने के लिए कोई सुरक्षित और गर्म स्थान नहीं मिल पाता। मजबूरी में उन्हें अस्पताल के बाहर, बरामदे में या इधर-उधर ठंड में भटककर समय बिताना पड़ता है। कड़ाके की ठंड के बावजूद रैन बसेरा लगातार बंद रहता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अस्पताल में आए तीमारदार ने बताया कि वे अपने मरीज को लेकर सीएचसी आए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में रैन बसेरा बना तो है, लेकिन हमेशा ताला बंद रहता है। मजबूरी में उन्हें भीषण ठंड में बाहर बैठकर रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं, एक अन्य परिजनों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को गरीबों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। इतनी ठंड के बावजूद रैन बसेरा न खोलना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
स्थानीय निवासी रंजीत राजपूत ने भी प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों पर तो रैन बसेरों के संचालन का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है। उन्होंने मांग की कि रैन बसेरे को तत्काल खोला जाए, ताकि मरीजों के परिजनों को ठंड से राहत मिल सके और उन्हें मानवीय परिस्थितियों में रात गुजारने का मौका मिल सके।

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