लखनऊl प्रदेश में तेजी से बढ़ती ठंड के बीच बेघर और किसान दोनों ही दोहरी मार झेल रहे हैं। प्रदेश के 35 जिलों में रैन बसेरों की स्थापना के लिए अभी तक उपयुक्त स्थल उपलब्ध नहीं हो सका है, जिसके कारण आगामी दिनों में तापमान में और गिरावट होने पर बेघर परिवारों, मजदूरों और राहगीरों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिला प्रशासन की ओर से जगह तलाशने का काम जारी है, लेकिन अब तक किसी भी स्थान पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
दूसरी ओर, प्रदेश के 13 जिलों में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा अब तक नहीं मिल सका है। कड़ी ठंड, बारिश, ओलावृष्टि और कीट प्रकोप जैसी परिस्थितियों में फसल नुकसान झेल चुके किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं में देरी के चलते हजारों किसान अभी भी राहत राशि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है और किसान लगातार कृषि विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच, प्रदेश भर के सभी जिलों के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के साथ राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारियों से लेकर तहसील स्तर के अधिकारियों तक की प्रगति रिपोर्ट ली गई। अधिकारियों को कंबल क्रय, अलाव व्यवस्था, रैन बसेरों की स्थिति, शीतलहर से बचाव के उपाय और राहत वितरण कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी जिले में देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
ठंड के दिनों में बेघर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए रैन बसेरों का समय से तैयार होना बेहद जरूरी है, वहीं किसानों को समय पर मुआवजा मिलना उनके जीवनयापन और अगली फसल की बुआई के लिए आवश्यक है। प्रशासनिक देरी से जुड़े इन दोनों मुद्दों पर प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को तत्काल व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं।






