महानगर के दुकानदार अधिकतर रेलिंग के बाहर रखे बैठे सामान
स्टील ग्रिल के बाद भी नहीं थमा अतिक्रमण, नगर निगम की योजना पर फिर उठे सवाल
शाहजहांपुर। महानगर को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से नगर निगम ने मुख्य बाजारों और व्यस्त इलाकों में दुकानों के आगे स्टील की ग्रिल लगवाई, लेकिन करोड़ों खर्च के बावजूद अतिक्रमण पर लगाम नहीं लग सकी। होली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही बाजारों में भीड़ बढ़ रही है और हालात और भी बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। नगर निगम ने करीब एक करोड़ 87 लाख 84 हजार रुपये की लागत से यह ग्रिल लगवाई थी।
मकसद था कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के सामने सामान न रख सकें और राहगीरों को जाम व पैदल चलने में होने वाली परेशानी से राहत मिल सके। हालांकि, ग्रिल लगने के कुछ ही महीनों बाद हालात पहले जैसे ही नहीं रहे, बल्कि और ज्यादा बिगड़ गए। कहीं स्टील ग्रिल को तोड़ दिया गया, तो कहीं उसके ऊपर ही दुकानदारी शुरू हो गई। कई स्थानों पर ग्रिल के आगे दोबारा अतिक्रमण कर लिया गया है। इससे साफ है कि नगर निगम की यह कवायद भी कागजों तक ही सीमित रह गई। यह पहला मौका नहीं है जब नगर निगम ने इस तरह की योजना पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए हों।
इससे पहले भी इसी तरह की रेलिंग और ग्रिल लगाई जा चुकी हैं, जो कुछ ही समय में या तो टूट गईं या फिर गायब हो गईं। बावजूद इसके, हर बार बिना सबक लिए वही प्रयोग दोहराया जा रहा है। न तो योजना की पारदर्शिता पर ध्यान दिया गया, न ही इसके स्थायित्व पर कोई ठोस विचार हुआ और न ही जिम्मेदारी तय करने की कोई ठोस व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि जनता को राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ती जा रही है, जबकि नगर निगम का भारी बजट हर बार सवालों के घेरे में आ जाता है।


