नई दिल्ली। लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के तीखे हमलों के बाद सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया है। यह कदम राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद उठाया गया, जिससे संसद के भीतर भारी हंगामा देखने को मिला।
बजट चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर “देश बेचने” का आरोप लगाया। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “सरेंडर मोड” में किया गया करार देते हुए कहा कि इससे भारत के किसानों और छोटे व्यापारियों के हित प्रभावित होंगे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर समझौता किया है और इस डील से भारत की तुलना में अमेरिका को अधिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार होती तो वह अमेरिका से बराबरी के स्तर पर बातचीत करती और देश के हितों से समझौता नहीं करती।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार “डर की राजनीति” कर रही है और अंतरराष्ट्रीय दबाव में फैसले ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किस देश से तेल खरीदे और किससे नहीं। किसी बाहरी शक्ति को भारत की नीतियों को निर्देशित करने का अधिकार नहीं है।
राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका में भी बड़ी संख्या में किसान वोटर हैं, लेकिन भारत अपने किसानों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की नजर भारत के डेटा और बाजार पर है तथा केंद्र सरकार इस पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
राहुल गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन के भीतर देश की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बयान दिए हैं, जो असंसदीय और भ्रामक हैं। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी के बयान की जांच कराई जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसी के साथ उनकी सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव भी सामने आया, जिससे सियासी तापमान और बढ़ गया।
सत्ता पक्ष का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर किया गया है और इससे निवेश, निर्यात तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े कॉरपोरेट और विदेशी दबाव में काम कर रही है।
लोकसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस और नारेबाजी के बीच कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्ताव पर आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मामला विशेषाधिकार समिति या अन्य संसदीय प्रक्रिया के तहत जाएगा। फिलहाल, राहुल गांधी के बयान और भाजपा के प्रस्ताव ने संसद से लेकर सियासी गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।






