कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को वैश्य (व्यापारी) समाज के साथ एक गंभीर और खुली चर्चा की, जिसमें उन्होंने भारत में वर्तमान व्यापारिक स्थिति पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की नीतियां छोटे और मध्यम व्यापारियों को लगातार बर्बाद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बड़े व्यापारिक समूहों का एकाधिकार, खराब GST और डर के माहौल ने देश के छोटे व्यापारियों को जकड़ रखा है और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है।
राहुल गांधी ने कहा, “उनकी ज़रूरतों को या तो अनदेखा किया जा रहा है, या सीधे तौर पर दबाया जा रहा है। प्रोत्साहन की जगह उपेक्षा है, समर्थन की जगह सज़ा। वही समुदाय जिसने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बनकर योगदान दिया, आज निराशा और भय में है।”
बैठक के बाद राहुल गांधी ने X पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा,
“हमारा व्यापार खत्म होने की कगार पर है। व्यापार संवाद में वैश्य समुदाय की यह दुख भरी पुकार हमें अंदर तक हिला गई। सरकार ने एकाधिकार को खुली छूट दे दी है और छोटे और मध्यम व्यापारियों को नौकरशाही और खराब GST जैसी नीतियों की जंजीरों में जकड़ दिया है। यह सिर्फ नीतिगत विफलता नहीं, बल्कि उत्पादन, रोजगार और भारत के भविष्य पर सीधा हमला है। इस लड़ाई में मैं देश के व्यापार की रीढ़ वैश्य समुदाय के साथ पूरी ताकत से खड़ा हूँ।”
राहुल गांधी ने आगे कहा, “देश में आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन तभी संभव है, जब छोटे और मध्यम व्यापारों को भी इसमें पूरी हिस्सेदारी मिले। और उनकी इस आवाज़ को मैं हमेशा बुलंदी से उठाता रहूंगा।”
साथ ही, उन्होंने संसद में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 पर चर्चा न करने के लिए बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि यह विधेयक विकास के लिए नहीं बल्कि विनाश के लिए तैयार किया गया है, जिसका खामियाजा भारतीयों को अपनी आजीविका खोकर भुगतना पड़ेगा।
राहुल गांधी की यह टिप्पणियां न केवल छोटे व्यापारियों की समस्याओं पर प्रकाश डालती हैं, बल्कि देश की आर्थिक नीतियों और सरकारी निर्णयों पर गहन चेतावनी भी देती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा समर्थन वैश्य समाज और छोटे व्यापारियों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगा।

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