कानपुर देहात के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 56 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया। यह भुगतान 5 करोड़ 83 लाख 7 हजार रुपये की स्वीकृत परियोजना के सापेक्ष किया गया, जिसमें टेंडर की विज्ञप्ति जारी होने के बाद ही 56 लाख 9 हजार 638 रुपये जारी कर दिए गए थे।
यह प्रकरण जिला मार्गों के उच्चीकरण योजना के तहत बुधौली–रसधान–डेरापुर मार्ग के चौड़ीकरण कार्य से जुड़ा है। वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी परियोजना की धनराशि कार्य की प्रगति और निर्धारित प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों के अनुरूप ही जारी की जाती है। यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे कार्यों के लिए भी टेंडर खुलने से पूर्व भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होता, ऐसे में अग्रिम भुगतान को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जा रहा है।
मामला तब और गरमा गया जब विभाग से जुड़े कुछ ठेकेदारों ने अधिकारियों को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि संबंधित खंड में तैनात कैशियर और अकाउंटेंट प्रत्येक बिल के भुगतान के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन की मांग करते हैं। ठेकेदारों का कहना है कि कथित कमीशन मिलने के बाद ही भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, मुख्य अभियंता स्तर से फिलहाल ऐसे किसी प्रकरण की जानकारी होने से इनकार किया गया है।
पूरे घटनाक्रम ने जिले में प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


